क्या भारत में भी अब बच्चों के लिए फेसबुक, इंस्टाग्राम और स्नैपचैट बीते दिनों की बात हो जाएगी? इंडिया-AI इम्पैक्ट समिट 2026 में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने एक ऐसा प्रस्ताव रखा है, जिसने देश के करोड़ों किशोरों और उनके माता-पिता का ध्यान खींच लिया है।
समिट को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति मैक्रों ने बच्चों की सुरक्षा को वैश्विक प्राथमिकता बताया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि फ्रांस 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने की प्रक्रिया शुरू कर रहा है। मैक्रों ने पीएम मोदी की ओर इशारा करते हुए कहा:
“माननीय प्रधानमंत्री जी, मुझे विश्वास है कि आप भी इस पहल से जुड़ेंगे। अगर भारत बच्चों और किशोरों की सुरक्षा के लिए इस तरह के कदम उठाता है, तो यह दुनिया के लिए बहुत अच्छी खबर होगी।”
मैक्रों का तर्क है कि जो चीज़ें असल दुनिया (Real World) में बच्चों के लिए वर्जित हैं, उन्हें इंटरनेट की दुनिया में भी नहीं होना चाहिए। उन्होंने इसे केवल ‘नियम’ नहीं, बल्कि एक ‘सभ्यता का सवाल‘ बताया।
अपने भाषण की शुरुआत ‘नमस्ते’ से करते हुए मैक्रों ने भारत के डिजिटल बदलाव की जमकर तारीफ की। उन्होंने मुंबई के एक रेहड़ी-पटरी वाले (Street Vendor) का उदाहरण देते हुए कहा 10 साल पहले उसके पास न बैंक अकाउंट था, न पहचान पत्र और न ही डिजिटल पहुंच। आज वही वेंडर अपने फोन पर तुरंत और फ्री पेमेंट लेता है। मैक्रों ने कहा कि 1.4 बिलियन लोगों के लिए डिजिटल पहचान और हर महीने 20 बिलियन ट्रांजेक्शन वाला पेमेंट सिस्टम बनाना कोई मामूली उपलब्धि नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा, “इंडिया ने वो कर दिखाया, जो दुनिया का कोई और देश नहीं कर पाया।”
भारत में यह मांग ऐसे समय में उठी है जब दुनिया के कई देश कड़े कदम उठा चुके हैं:
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ऑस्ट्रेलिया: बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की दिशा में बढ़ चुका है।
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यूरोप: ग्रीस और स्पेन जैसे देश फ्रांस के इस ‘डिजिटल प्रोटेक्शन’ मॉडल का समर्थन कर रहे हैं।
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भारत: देश में भी लंबे समय से बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और साइबर बुलिंग को देखते हुए रेगुलेशन की मांग की जा रही है।
अगर भारत सरकार इस दिशा में कदम उठाती है, तो:
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15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया अकाउंट बनाना मुश्किल हो जाएगा।
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टेक कंपनियों (Meta, X आदि) को ‘एज वेरिफिकेशन’ के कड़े नियम लागू करने होंगे।
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बच्चों के डेटा और ऑनलाइन सेफ्टी को लेकर नए कानून आ सकते हैं।
क्या आपको लगता है कि भारत में भी 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन कर देना चाहिए? अपनी राय हमें कमेंट में बताएं।





















