हरियाणा की दो राज्यसभा सीटों के नतीजों ने प्रदेश की सियासत में भूचाल ला दिया है। कहने को तो बीजेपी और कांग्रेस ने 1-1 सीट जीत ली है, लेकिन इस जीत के पीछे छिपी ‘भीतरघात’ ने कांग्रेस की अंदरूनी कलह को सरेआम कर दिया है। निर्दलीय प्रत्याशी सतीश नांदल के पक्ष में हुई क्रॉस वोटिंग ने कांग्रेस नेतृत्व की नींद उड़ा दी है।
16 मार्च को हुए मतदान में बीजेपी के संजय भाटिया आसानी से अपनी सीट निकाल ले गए, वहीं कांग्रेस के करमवीर सिंह बौध ने निर्दलीय सतीश नांदल को कड़े मुकाबले में मात दी। जीत के बावजूद कांग्रेस खेमे में जश्न से ज्यादा मातम और गुस्से का माहौल है। कारण है— 5 विधायकों की कथित ‘गद्दारी’ और 4 विधायकों के वोटों का रद्द होना।
हालांकि पार्टी ने अभी तक आधिकारिक तौर पर नामों की घोषणा नहीं की है, लेकिन कांग्रेस विधायक गीता भुक्कल के बयान ने आग में घी डालने का काम किया है। उन्होंने मीडिया के सामने खुलकर उन नामों का जिक्र किया है जिन पर क्रॉस वोटिंग का संदेह है:
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मोहम्मद इलियास
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मोहम्मद इसराइल
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रेनू बाला
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जर्नैल सिंह
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शैली चौधरी
क्रॉस वोटिंग के आरोपों का असर अब नियुक्तियों पर भी दिखने लगा है। शक के घेरे में आईं विधायक शैली चौधरी के पति राम किशन गुर्जर ने न केवल पार्टी की प्राथमिक सदस्यता छोड़ी, बल्कि राज्य कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष पद से भी इस्तीफा दे दिया है। हरियाणा विधानसभा चुनाव की हार के बाद, यह कांग्रेस के लिए एक और बड़ा संगठनात्मक झटका माना जा रहा है। नेता प्रतिपक्ष भूपिंदर सिंह हुड्डा ने कहा कि जिन विधायकों ने गद्दारी की है, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। हमने 5 विधायकों के नाम केंद्रीय नेतृत्व को भेज दिए हैं और जल्द ही उन पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
हरियाणा कांग्रेस के प्रभारी बीके हरिप्रसाद ने भी साफ कर दिया है कि पार्टी के भीतर अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। 90 सदस्यीय विधानसभा में इनेलो के दो विधायकों के तटस्थ रहने के बावजूद कांग्रेस के वोट कटना पार्टी की रणनीति पर बड़े सवाल खड़ा करता है।















