राजधानी लखनऊ की सड़कों पर इस बार रेड लाईट पर बच्चे भीख मांगते हुए नहीं बल्कि सचिवालय के बाहर तिरंगे को सलामी देते नजर आएंगे। जी हां, आप सही पढ़ रहे हैं। जो बच्चे कभी सड़कों पर भीख मांगने को मजबूर थे, वे अब उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 2026 की गणतंत्र दिवस परेड में अपनी कला और अनुशासन का प्रदर्शन करेंगे। गणतंत्र दिवस के अवसर पर ये बच्चे विधानसभा के सामने आयोजित परेड में हिस्सा लेंगे, जहां वे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के सामने मार्च पास्ट करेंगे और तिरंगे के साथ जयघोष करेंगे।
एक निजी चैनल के खबर के मुताबिक संभल ज़िले में किए गए सर्वे में सामने आया कि वहां 190 भिखारी परिवार हैं, जिनके 282 बच्चे सड़कों पर भीख मांग रहे थे। इसके बाद जिला प्रशासन की टीम ने बच्चों और उनके परिवारों को समझाया, भिक्षावृत्ति से होने वाले नुकसान बताए और शिक्षा व रोजगार के फायदे बताए। फिर इन बच्चों का स्कूलों में दाखिला कराया गया। इन्हीं में से 20 बच्चों का चयन 2026 की गणतंत्र दिवस परेड के लिए हुआ है। इस पूरी पहल में ‘उम्मीद’ संस्था ने अहम भूमिका निभाई।
इस बार परेड में लखनऊ के बच्चों के साथ संभल ज़िले के लगभग 20 बच्चे भी हिस्सा ले रहे हैं। ये बच्चे मार्च पास्ट के साथ-साथ सांस्कृतिक प्रस्तुति भी देंगे। “सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तान हमारा” की धुन पर कदमताल करते हुए ये बच्चे आत्मविश्वास से भरे नजर आएंगे। इन बच्चों को विशेष अभियान के तहत भिक्षावृत्ति से मुक्त कराया गया है।
‘उम्मीद’ संस्था की कार्यकर्ता रेशमा ने बताया कि सरकार बच्चों के लिए योजनाएं दे रही है, जिन पर संस्था ज़मीनी स्तर पर काम कर रही है। सरकार, प्रशासन और सामाजिक संस्थाओं की इस संयुक्त कोशिश ने न सिर्फ बच्चों को सड़कों से निकालकर शिक्षा से जोड़ा, बल्कि उन्हें आत्मसम्मान और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का मौका भी दिया है। जो बच्चे कभी दूसरों के सामने हाथ फैलाते थे, वही बच्चे अब बैंड-बाजे और तिरंगे के साथ लखनऊ की परेड में कदमताल करते नजर आएंगे।





































