पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद से उठी एक बयानबाज़ी ने एक बार फिर देश की राजनीति और सियासी तापमान को उबाल पर ला दिया है। जनता उन्नयन पार्टी (JUP) के अध्यक्ष और निलंबित तृणमूल कांग्रेस विधायक हुमायूं कबीर ने बाबरी मस्जिद के निर्माण को लेकर ऐसा ऐलान कर दिया है, जिसने बंगाल से लेकर दिल्ली और लखनऊ तक हलचल मचा दी है।
हुमायूं कबीर ने दावा किया है कि 11 फरवरी को सुबह 10 बजे 1,200 लोग एक साथ कुरान पढ़ेंगे, और इसके तुरंत बाद बाबरी मस्जिद के निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। उन्होंने कहा कि दोपहर 12 बजे से औपचारिक निर्माण कार्य शुरू होगा, और अगले दो वर्षों में मस्जिद बनकर पूरी हो जाएगी।
एक न्यूज एजेंसी से बातचीत में हुमायूं कबीर ने कहा कि जब अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण हुआ, तब उन्होंने या उनके समर्थकों ने कोई विरोध नहीं किया। उन्होंने बहरामपुर का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी राम मंदिर की नींव रखी गई थी और किसी ने आपत्ति नहीं जताई।
हुमायूं कबीर ने दो टूक कहा, “संविधान मुझे अपने धर्म से जुड़े मामलों पर फैसला लेने का अधिकार देता है। कोई ताकत मुझे रोक नहीं सकती। अगर कोई रुकावट आई, तो मैं उसका मुकाबला करूंगा।”
मुर्शिदाबाद में दिए गए बयान में हुमायूं कबीर ने कहा, “यह अयोध्या और उत्तर प्रदेश नहीं है। यह पश्चिम बंगाल है। मुर्शिदाबाद वही जिला है जहां से कभी बंगाल, बिहार और ओडिशा का शासन चलता था। अंग्रेज़ी हुकूमत में लॉर्ड क्लाइव यहीं से शासन करता था। आज़ादी के बाद कोलकाता राजधानी बनी, लेकिन मुर्शिदाबाद की ऐतिहासिक परंपराएं आज भी ज़िंदा हैं। हम उन्हीं परंपराओं को वापस लाने जा रहे हैं।”
उनके इस बयान को राजनीतिक विश्लेषक सीधे तौर पर धार्मिक ध्रुवीकरण से जोड़कर देख रहे हैं, खासकर ऐसे समय में जब बंगाल की राजनीति पहले से ही बेहद संवेदनशील दौर से गुजर रही है। हुमायूं कबीर ने यह भी घोषणा की कि 12 फरवरी को ‘बाबरी यात्रा’ निकाली जाएगी, जिसकी कुल दूरी 235 किलोमीटर होगी। यह यात्रा रात में इटाहार में समाप्त होगी। प्रशासन के लिए यह यात्रा कानून-व्यवस्था के लिहाज से एक बड़ी चुनौती मानी जा रही है।
इस बयान का असर सिर्फ बंगाल तक सीमित नहीं रहा। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हिंदू संगठनों ने विरोध शुरू कर दिया है। शहर में कई जगह होर्डिंग्स लगाए गए हैं, जिन पर भड़काऊ नारे लिखे हैं— “बाबरी फिर से गिराएंगे” और “चलो मुर्शिदाबाद 10 फरवरी।” इन होर्डिंग्स के सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं और दोनों राज्यों में स्थिति पर पैनी नजर रखी जा रही है।
हुमायूं कबीर के इस ऐलान ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं— क्या यह बयान धार्मिक आस्था से जुड़ा है या सियासी रणनीति का हिस्सा? क्या आने वाले दिनों में बंगाल एक बार फिर बड़े सांप्रदायिक तनाव की ओर बढ़ रहा है? और क्या प्रशासन इस पूरे घटनाक्रम पर सख्ती से नियंत्रण रख पाएगा? फिलहाल इतना तय है कि मुर्शिदाबाद से उठा यह बयान आने वाले दिनों में देश की राजनीति को और ज्यादा गर्माने वाला है और इसकी गूंज संसद से लेकर सड़कों तक सुनाई दे सकती है।
























