रोहतक: डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को 4 जनवरी 2026 को फिर से 40 दिनों की पैरोल दी गई, जो उनकी 2017 की सजा के बाद 15वीं अस्थायी रिहाई है। वे दो शिष्याओं के बलात्कार और एक पत्रकार की हत्या के मामले में 20 साल की सजा काट रहे हैं और रोहतक की सुनारिया जेल में बंद हैं। इस पैरोल पर वे सिरसा स्थित डेरा मुख्यालय में रहेंगे।
गुरमीत राम रहीम को अगस्त 2017 में विशेष सीबीआई कोर्ट ने बलात्कार के दो मामलों में 20 साल की सजा सुनाई थी। 2019 में पत्रकार रामचंदर छत्रपति की हत्या के लिए उम्रकैद भी हुई। इसके बावजूद, 2020 से वे बार-बार पैरोल या फरलो पर बाहर आते रहे हैं। कुल मिलाकर, जनवरी 2026 तक उनकी 15 रिहाइयां हो चुकी हैं, जिसमें वे जेल के बाहर 400 दिनों से ज्यादा समय बिता चुके हैं।

कब-कब मिली पैरोल/फरलो (टाइमलाइन):
- अक्टूबर 2020: 1 दिन की पैरोल (पहली रिहाई)।
- मई 2021: 12 घंटे की पैरोल (बीमार मां से मिलने)।
- फरवरी 2022: 21 दिन का फरलो।
- जून 2022: 30 दिन की पैरोल।
- अक्टूबर 2022: 40 दिन की पैरोल।
- 2023-2024: कई पैरोल, जिसमें चुनावों से पहले रिहाइयां शामिल (विस्तृत तारीखें सार्वजनिक नहीं, लेकिन कुल गिनती में शामिल)।
- अगस्त 2024: 21 दिन का फरलो।
- अक्टूबर 2024: 20 दिन की पैरोल (हरियाणा विधानसभा चुनाव से पहले)।
- जनवरी 2025: 30 दिन की पैरोल (दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले)।
- अप्रैल 2025: 21 दिन का फरलो।
- अगस्त 2025: 40 दिन की पैरोल (जन्मदिन मनाने)।
- जनवरी 2026: 40 दिन की पैरोल (वर्तमान, 15वीं रिहाई)।

पैरोल के दौरान राम रहीम अक्सर उत्तर प्रदेश के बागपत डेरा आश्रम या सिरसा मुख्यालय में रहते हैं। यहां वे अनुयायियों से मिलते हैं और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करते हैं।
इन बार-बार पैरोल पर काफी विवाद है। सिख संगठन, विपक्षी दल और पीड़ितों के परिवार इसे “राजनीतिक पक्षपात” बताते हैं, क्योंकि कई रिहाइयां चुनावों से पहले हुईं। पत्रकार के बेटे अंशुल छत्रपति ने कहा कि राम रहीम “कट्टर अपराधी” हैं, फिर भी विशेष सुविधा मिल रही है। हरियाणा सरकार इसे “अच्छे आचरण” का आधार बताती है। यह मामला न्याय व्यवस्था में असमानता के सवाल उठाता है।डेरा सच्चा सौदा के लाखों अनुयायी हरियाणा, पंजाब और राजस्थान में हैं, जो राजनीतिक प्रभाव रखते हैं। आगे भी पैरोल की संभावना बनी हुई है।








