हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के भरमौर विधानसभा क्षेत्र से एक बेहद दुखद और चौंकाने वाली घटना सामने आई है। ग्राम पंचायत खुंदेल के गिरड़ गांव में स्थित करीब 200 साल पुराना ऐतिहासिक गिरड़ माता मंदिर शुक्रवार को भीषण आग की चपेट में आ गया। अचानक लगी आग ने कुछ ही समय में पूरे मंदिर परिसर को अपनी लपटों में ले लिया, जिससे यह प्राचीन मंदिर पूरी तरह जलकर राख हो गया।
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और आग लगने के कारणों की जांच शुरू कर दी गई है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि आग शॉर्ट सर्किट, प्राकृतिक कारणों या किसी अन्य वजह से लगी।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शुक्रवार को अचानक मंदिर से धुआं उठता दिखाई दिया और देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। ग्रामीणों ने अपने स्तर पर आग बुझाने के भरसक प्रयास किए, लेकिन लकड़ी से बनी पारंपरिक संरचना होने के कारण आग तेजी से फैलती चली गई। पानी और अन्य संसाधनों की कमी के चलते आग पर काबू नहीं पाया जा सका।
इस अग्निकांड में न केवल मंदिर की इमारत पूरी तरह नष्ट हो गई, बल्कि मंदिर के भीतर स्थापित सदियों पुरानी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को भी अपूरणीय क्षति पहुंची है। मंदिर में संगमरमर और दुर्लभ ‘ब्लैक स्टोन’ से बनी माता की मूर्तियां आग की तेज तपिश के कारण बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं। इसके अलावा पीतल से बनी ऐतिहासिक मूर्तियों को भी भारी नुकसान पहुंचा है।
देवदार की लकड़ी से निर्मित मंदिर की संरचना और उस पर की गई प्राचीन व दुर्लभ नक्काशी, जो इस क्षेत्र की पारंपरिक वास्तुकला का अद्भुत उदाहरण थी, अब पूरी तरह नष्ट हो चुकी है। यह नक्काशी स्थानीय कारीगरों की पीढ़ियों पुरानी कला को दर्शाती थी।
गिरड़ माता मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र था, बल्कि पूरे क्षेत्र की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान भी माना जाता था। मंदिर के नष्ट होने से स्थानीय लोगों में गहरा दुख और आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि यह मंदिर उनकी आस्था, परंपरा और इतिहास से जुड़ा हुआ था, जिसकी भरपाई संभव नहीं है।
प्रशासन की ओर से नुकसान का आकलन किया जा रहा है। वहीं, स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने सरकार से मंदिर के पुनर्निर्माण और बची हुई मूर्तियों व अवशेषों के संरक्षण की मांग की है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद आग लगने के वास्तविक कारणों का खुलासा किया जाएगा। यह हादसा एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में स्थित प्राचीन लकड़ी के मंदिरों की सुरक्षा और संरक्षण को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।




























