नई दिल्ली: 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की कथित ‘बड़ी साजिश’ मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद चार आरोपियों — गुलफिशा फातिमा, शिफा-उर-रहमान, मीरान हैदर और मोहम्मद सलीम खान — को 7 जनवरी 2026 को जेल से रिहा कर दिया गया। यह रिहाई लगभग पांच से छह साल की लंबी हिरासत के बाद मिली राहत है, हालांकि मुकदमा अभी जारी रहेगा। सुप्रीम कोर्ट ने 5 जनवरी 2026 को इन चारों सहित पांच आरोपियों (शादाब अहमद सहित) को सशर्त जमानत दे दी थी। कोर्ट ने कहा कि इनकी भूमिका सीमित प्रतीत होती है और लंबी जेल अवधि को ध्यान में रखते हुए जमानत उचित है। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह आरोपों की गंभीरता को कम नहीं करता। इसी मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी गईं, क्योंकि कोर्ट को उनके खिलाफ पर्याप्त सामग्री मिली।
दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने 7 जनवरी को जमानत बॉन्ड स्वीकार करने के बाद रिहाई के आदेश जारी किए। गुलफिशा फातिमा, शिफा-उर-रहमान और मीरान हैदर को तिहाड़ जेल से देर रात रिहा किया गया, जबकि मोहम्मद सलीम खान मंडोली जेल से बाहर आए। रिहाई के समय परिवार के सदस्यों और समर्थकों ने भावुक स्वागत किया। कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए, जिनमें आरोपी जेल गेट से बाहर निकलते और गले मिलते नजर आ रहे हैं।

ये आरोपी सीएए-एनआरसी विरोधी प्रदर्शनों से जुड़े थे और यूएपीए (UAPA) सहित गंभीर धाराओं के तहत गिरफ्तार किए गए थे। 2020 के फरवरी में हुए दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी और सैकड़ों घायल हुए थे। पुलिस का आरोप है कि यह प्रदर्शनों के जरिए सुनियोजित साजिश थी।जमानत पर कड़ी शर्तें लगाई गई हैं, जैसे दिल्ली छोड़ने से पहले अनुमति, नियमित पुलिस रिपोर्टिंग, मामले पर सार्वजनिक टिप्पणी न करना और कोई अपराध न करना। कुछ पीड़ित परिवारों ने इस रिहाई को ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ बताया है, जबकि समर्थकों ने इसे न्याय की जीत करार दिया।

यह मामला लंबे समय से विवादास्पद रहा है, जहां एक तरफ लंबी हिरासत की आलोचना हो रही है, तो दूसरी तरफ आरोपों की गंभीरता पर जोर दिया जा रहा है। ट्रायल अभी शुरू होना बाकी है।










