उत्तर प्रदेश के एटा जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक छोटा सा बच्चा (लगभग 8-10 साल का) अपनी मां के इलाज और अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी अकेले उठा रहा है। बच्चे ने बताया कि उसने अकेले ही अपनी मां का इलाज फर्रुखाबाद, कानपुर और यहां तक कि दिल्ली तक कराया। पिछले आठ दिनों से वह मेडिकल कॉलेज (संभवतः एटा या आसपास के मेडिकल कॉलेज) में दिन-रात मां की सेवा में लगा रहा, लेकिन मां की मौत हो गई। यह मामला जैथरा थाना क्षेत्र के नगला धीरज गांव का है। बच्चे के पिता की मौत पहले ही एड्स से हो चुकी थी, जिसके बाद समाज और रिश्तेदारों ने परिवार से दूरी बना ली। जायदाद के लालच या बीमारी के डर से किसी ने मदद नहीं की। मां नीलम गंभीर बीमारी से जूझ रही थीं। बच्चे ने फर्रुखाबाद के लोहिया अस्पताल, कानपुर के अस्पतालों और दिल्ली तक डॉक्टरों से संपर्क किया, लेकिन जान नहीं बचा सके।

मां की मौत के बाद अस्पताल में शव पड़ा रहा, कोई रिश्तेदार नहीं आया। बच्चा अकेला शव लेकर पोस्टमार्टम कराने जिला मुख्यालय पहुंचा। पुलिस और अस्पताल कर्मचारियों ने मदद की, लेकिन बच्चे की हिम्मत और बेबसी ने सबको रुला दिया। पुलिस ने अंतिम संस्कार की व्यवस्था की।यह घटना समाज में मानवता की कमी, सामाजिक बहिष्कार और परिवार की जिम्मेदारी पर सवाल उठाती है। बच्चे की कहानी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, जहां लोग उसकी बहादुरी की तारीफ कर रहे हैं, लेकिन साथ ही दुखी भी हैं।














