अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिर से ग्रीनलैंड पर अपनी महत्वाकांक्षा जाहिर की है। BBC की रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप ने कहा है कि रूस और चीन को इस आर्कटिक द्वीप पर कब्जा करने से रोकने के लिए अमेरिका को ग्रीनलैंड का पूरा मालिकाना हक चाहिए। शुक्रवार (9 जनवरी 2026) को बीबीसी के एक सवाल के जवाब में ट्रंप ने कहा, “देशों के पास मालिकाना हक होना चाहिए और आप मालिकाना हक की रक्षा करते हैं, लीज की नहीं। और हमें ग्रीनलैंड की रक्षा करनी होगी।” उन्होंने जोड़ा कि अगर चीन या रूस ने इसे हासिल किया तो अमेरिका के लिए खतरा बढ़ जाएगा।
ट्रंप ने दावा किया कि ग्रीनलैंड के आसपास “रूसी और चीनी जहाजों से भरा पड़ा है” (हालांकि इस दावे के सबूत नहीं दिए गए)। उन्होंने कहा कि अमेरिका इसे “आसान तरीके से” या “कठिन तरीके से” हासिल करेगा। व्हाइट हाउस ने भी पुष्टि की कि ग्रीनलैंड को हासिल करना “राष्ट्रीय सुरक्षा की प्राथमिकता” है और सभी विकल्प खुले हैं, जिसमें सैन्य कार्रवाई भी शामिल है।

ट्रंप की इस योजना पर डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने कड़ा विरोध जताया है। डेनमार्क की प्रधानमंत्री ने कहा कि ग्रीनलैंड बिकने के लिए नहीं है, और कोई सैन्य कार्रवाई नाटो गठबंधन को खत्म कर सकती है। ग्रीनलैंड के लोग भी इसे “पागलपन” बता रहे हैं और कहते हैं कि वे पहले से ही “क्लेम्ड” हैं, लेकिन अमेरिका बनना नहीं चाहते।
ट्रंप की यह बातें 2019 से चली आ रही हैं, लेकिन अब 2026 में व्हाइट हाउस सक्रिय रूप से खरीद या अन्य विकल्पों पर चर्चा कर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि सैन्य कब्जा आसान हो सकता है, लेकिन इससे नाटो टूट सकता है और वैश्विक संकट पैदा हो सकता है।ट्रंप का यह बयान आर्कटिक में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव को उजागर करता है, जहां रूस, चीन और अमेरिका के बीच प्रतिस्पर्धा तेज हो रही है। दुनिया अब देख रही है कि यह “रियल एस्टेट डील” कितनी दूर तक जाती है।








