पाकिस्तान के ड्रोन अब भारत के लिए एक बड़ा खतरा बन चुके हैं, खासकर पंजाब, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर की सीमा पर। ये ड्रोन मुख्य रूप से नशीले पदार्थ (ड्रग्स), हथियार, ग्रेनेड और विस्फोटक सामग्री की तस्करी के लिए इस्तेमाल हो रहे हैं, जो आतंकवाद को बढ़ावा देते हैं। 2025 में 791 ड्रोन घुसपैठ दर्ज की गईं, जिनमें से 237 को भारतीय सेनाओं ने निष्क्रिय किया—इनमें 5 में युद्ध सामग्री, 72 में नारकोटिक्स और बाकी बिना पेलोड के थे।
पाकिस्तान के ड्रोन कितने खतरनाक?
पाकिस्तान चीनी और तुर्की मूल के ड्रोन (जैसे DJI Mavic, Burraq, Bayraktar) का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करता है। ये कम लागत वाले, लंबी रेंज वाले और स्टेल्थ फीचर्स वाले होते हैं। मई 2025 के ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान ने सैकड़ों (350-400 तक) ड्रोन स्वार्म हमले किए, जो भारतीय शहरों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिश थी। ये ड्रोन आतंकी कैंपों को सप्लाई, घुसपैठ और सीधी हमलों के लिए इस्तेमाल होते हैं। 2025 में पंजाब में ही 12 किलो हेरोइन जैसी बड़ी खेपें ड्रोन से ड्रॉप हुईं। खतरा इतना बढ़ गया है कि ये न्यूक्लियर तनाव के बाद भी जारी हैं, और पाकिस्तान की ISI इनका समर्थन करती है।
भारत की तैयारी कितनी मजबूत?
भारत की एंटी-ड्रोन क्षमता काफी मजबूत हो चुकी है। DRDO और BEL द्वारा विकसित D4 (Drone Detect, Deter, Destroy) सिस्टम, SAKSHAM, IDD&IS (लेजर-आधारित), स्पूफर्स, जेमर्स और S-400, Akash, Barak-8 जैसे एयर डिफेंस सिस्टम ने 2025 में पाकिस्तानी ड्रोन स्वार्म को बड़े पैमाने पर नाकाम किया। ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने सैकड़ों ड्रोन को मार गिराया या वापस भेज दिया। BSF ने पंजाब में वाहन-माउंटेड एंटी-ड्रोन सिस्टम तैनात किए हैं, और 2025 में 100+ ड्रोन जब्त किए। लेजर और माइक्रोवेव हथियारों से “सॉफ्ट किल” (जैमिंग) और “हार्ड किल” (नष्ट करना) संभव है। हालांकि, फॉग सीजन में चुनौतियां बनी रहती हैं, लेकिन भारत की तैयारी क्रांतिकारी स्तर पर है—आत्मनिर्भर भारत के तहत इंडिजिनस टेक पर फोकस है।








