ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली ख़ामेनेई का शासन दशकों से मजबूत रहा है, लेकिन 2026 में बढ़ते विरोध प्रदर्शनों, आर्थिक संकट और क्षेत्रीय हारों ने सवाल खड़े कर दिए हैं: क्या इसका अंत सीरिया के बशर अल-असद शासन जैसा होगा? असद का पतन 2024-2025 में हुआ, जब विद्रोहियों ने दमिश्क पर कब्जा कर लिया और असद रूस भाग गया ईरान में भी विरोध की लहरें (महसा अमिनी मौत के बाद शुरू हुईं) तेज हो रही हैं, लेकिन क्या इतिहास दोहराएगा? आइए विश्लेषण करें।
सीरिया की तानाशाही का अंतसीरिया में असद का शासन 2011 में अरब स्प्रिंग से शुरू हुए गृहयुद्ध में फंस गया। रूस और ईरान की मदद से असद ने सालों तक टिका रहा, लेकिन 2024 में इजराइल के हमलों और विद्रोही गुटों (जैसे HTS) के उभार से शासन ढह गया।लाखों मौतें, करोड़ों विस्थापित और देश तबाह। असद की तानाशाही की विशेषताएं: दमनकारी सुरक्षा बल, विदेशी प्रॉक्सी पर निर्भरता और आर्थिक पतन। अंत में, रूस ने असद को शरण दी, लेकिन सीरिया में अराजकता बनी रही
ईरान की वर्तमान स्थिति
2026 में ईरान में विरोध प्रदर्शन तेज हैं। मुद्रा संकट (रियाल का पतन), बेरोजगारी और महिलाओं के अधिकारों पर दमन ने आग भड़काई है। क्षेत्रीय झटके: हिजबुल्लाह कमजोर, असद गिरा, इजराइल के हमलों से IRGC प्रभावित। ख़ामेनेई के करीबी मॉस्को भागने की योजना बना रहे हैं, असद की तरह। हजारों मौतें हो चुकी हैं, और डिजिटल ब्लैकआउट से विद्रोह बढ़ रहा है।
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समानताएं और अंतरदोनों शासन तानाशाही हैं: ख़ामेनेई और असद दोनों ने विरोध को कुचला, लेकिन विदेशी दबाव (अमेरिका, इजराइल) से कमजोर हुए। ईरान की “एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस” टूट रही है, जैसे सीरिया में। हालांकि, अंतर महत्वपूर्ण: ईरान की अर्थव्यवस्था बड़ी, IRGC मजबूत (सीरिया की सेना से बेहतर), और परमाणु कार्यक्रम से वैश्विक चिंता। सीरिया में गृहयुद्ध अंतरराष्ट्रीय था, लेकिन ईरान में अभी एकजुट विपक्ष नहीं। फिर भी, विशेषज्ञ कहते हैं कि “इस बार अलग है”—आंतरिक और बाहरी खतरे परफेक्ट स्टॉर्म हैं।
अगर विरोध बढ़े और सेना में विद्रोह हुआ, तो ख़ामेनेई असद जैसा भाग सकते हैं—रूस या अन्य सहयोगी की शरण में। लेकिन शासन गिरने से ईरान में “सीरिया-इजेशन” हो सकता है: गृहयुद्ध, विभाजन और लाखों मौतें।








