ईरान में जारी हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बीच शुक्रवार-शनिवार की रात कई भारतीय नागरिक सुरक्षित रूप से दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर लौट आए। ये नागरिक मुख्य रूप से छात्र, तीर्थयात्री और अन्य निवासी थे, जो ईरान में फंस गए थे। भारत सरकार की एडवाइजरी और भारतीय दूतावास की मदद से वे वाणिज्यिक उड़ानों से तेहरान और शिराज से दिल्ली पहुंचे। पहली दो उड़ानें शुक्रवार रात देर से लैंड हुईं, जिसमें जम्मू-कश्मीर के कई छात्र शामिल थे।ईरान में दिसंबर 2025 के अंत से शुरू हुए प्रदर्शन ईरानी रियाल की भारी गिरावट, महंगाई, पानी की कमी और बिजली कटौती जैसे मुद्दों पर भड़के थे। ये अब पूरे 31 प्रांतों में फैल चुके हैं और सरकार विरोधी नारे जैसे “डेथ टू खामेनेई” और “माई लाइफ फॉर ईरान” गूंज रहे हैं। अधिकारियों की कड़ी कार्रवाई में हजारों मौतें और गिरफ्तारियां हुई हैं, जबकि इंटरनेट शटडाउन से संपर्क लगभग असंभव हो गया है।
दिल्ली एयरपोर्ट पर मीडिया से बात करते हुए लौटे भारतीयों ने हालात का बयान दिया। एक जम्मू-कश्मीर निवासी छात्र ने कहा, “प्रदर्शन बहुत खतरनाक थे। सरकार ने छात्रों को वापस लाने में सराहनीय प्रयास किया।” एक एमबीबीएस छात्रा (शिराज यूनिवर्सिटी) ने बताया, “स्थिति सामान्य लग रही थी, लेकिन इंटरनेट बिल्कुल बंद था। प्रदर्शन की खबरें सुनीं, लेकिन खुद नहीं देखा।” एक अन्य ने कहा, “पिछले 1-2 हफ्तों में दिक्कतें बढ़ीं। बाहर निकलते तो प्रदर्शनकारी कार के सामने आ जाते, थोड़ी परेशानी करते। परिवार से संपर्क नहीं हो पाता था।”भारतीय दूतावास ने 5 जनवरी से एडवाइजरी जारी की थी, जिसमें ईरान न जाने और वहां से निकलने की सलाह दी गई। MEA ने गैर-जरूरी यात्रा से बचने को कहा। लौटे नागरिकों ने सरकार और दूतावास की सहायता के लिए आभार जताया, कई ने कहा “मोदी जी हैं तो हर चीज मुमकिन है।”
परिवार एयरपोर्ट पर इंतजार करते दिखे, भावुक मंजर रहा।यह घटना ईरान में बढ़ते अस्थिरता को दर्शाती है, जहां अमेरिका समेत कई देश अपने नागरिकों को निकाल रहे हैं। भारत ने अभी और नागरिकों की वापसी की तैयारी की है।






















