पीड़ित पप्पू दिवाकर, बहेड़ी तहसील के गरसौली गांव का निवासी है और अनुसूचित जाति (दलित) से संबंधित है। वह पिछले तीन महीनों से आरोपी चंद्रसेन के यहां रह रहा था। रिपोर्ट्स के अनुसार, चंद्रसेन ने ट्रैक्टर खरीदने के लिए पप्पू से करीब 4.5 लाख रुपये उधार लिए थे। जब पप्पू ने अपना पैसा वापस मांगा, तो विवाद बढ़ गया। आरोपी ने रुपये लौटाने से इनकार कर दिया और धमकी दी।घटना में आरोप है कि चंद्रसेन, उसके बेटे पप्पू और गोधनलाल सहित कुछ अन्य लोगों ने मिलकर युवक को बेरहमी से पीटा। मारपीट के बाद उन्होंने उसका सिर मुंडवा दिया, मूंछें और भौंहें काट दीं। सबसे क्रूर हिस्सा यह था कि चेहरे पर कीचड़ (या कालिख) पोत दिया गया। पीड़ित का आरोप है कि आरोपी जातिसूचक गालियां भी देते रहे और अपमानजनक हरकत का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया, ताकि और अधिक शर्मिंदगी हो।
घटना से डरे-सहमे पप्पू दिवाकर ने शनिवार (18 जनवरी 2026) को नवाबगंज थाने पहुंचकर तहरीर दी। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया और चंद्रसेन, उसके बेटे पप्पू तथा गोधनलाल को नामजद करते हुए 4-5 अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, दो आरोपियों को हिरासत में लिया गया है और तीसरे की तलाश जारी है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है, जिसमें एससी/एसटी एक्ट के तहत धाराएं भी लगाई जा सकती हैं।यह घटना उत्तर प्रदेश में दलितों के खिलाफ बढ़ती हिंसा और आर्थिक शोषण के मामलों को उजागर करती है। उधार के नाम पर शोषण, फिर जबरन अपमान और सार्वजनिक अपमानजनक व्यवहार—यह सब जातिगत पूर्वाग्रह से जुड़ा लगता है। वीडियो वायरल होने से सामाजिक संगठनों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने निंदा की है, न्याय की मांग की जा रही है।
यह मामला न केवल एक व्यक्ति की त्रासदी है, बल्कि समाज में मौजूद असमानता, दबंगई और कानून की कमजोर पकड़ पर गंभीर सवाल खड़े करता है। पुलिस को जल्द कार्रवाई कर आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचाना होगा, ताकि ऐसे अमानवीय कृत्यों पर लगाम लगे।




























