पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर तीखे मोड़ पर खड़ी है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर यह आरोप तेज़ होता जा रहा है कि वह अब पूरे बंगाल की नहीं, बल्कि केवल तृणमूल कांग्रेस की मुख्यमंत्री बनकर रह गई हैं। भाजपा के लगातार आक्रामक तेवरों ने तृणमूल खेमे में खलबली मचा दी है और आने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी पारा लगातार चढ़ता जा रहा है।
तृणमूल कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं और मंत्रियों पर भर्ती घोटाला, जमीन सौदे और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर आरोप लग रहे हैं। केंद्रीय एजेंसियों की जांच और लगातार हो रही कार्रवाइयों ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इन मामलों ने तृणमूल की छवि को आम जनता के बीच गहरा नुकसान पहुंचाया है।

नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने कई बार बंगाल विधानसभा की भीतर और सार्वजनिक मंचों से ममता सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा है कि पश्चिम बंगाल आज भ्रष्टाचार, हिंसा और तुष्टिकरण की राजनीति का केंद्र बन चुका है। ममता बनर्जी सरकार जनता के सवालों से भाग रही है। भाजपा इस बार बंगाल को भ्रष्टाचार मुक्त करने के संकल्प के साथ मैदान में है।
वहीं दूसरी तरफ प्रदेश भाजपा अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने एक निजी चैनल के इंटरव्यू में सरकार को घेरते हुए कहा कि तृणमूल सरकार ने लोकतंत्र को कुचल दिया है। भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमले हो रहे हैं, लेकिन जनता अब जाग चुकी है। आने वाले चुनाव में बंगाल बदलाव की ओर बढ़ेगा।
तृणमूल कांग्रेस इन आरोपों को राजनीतिक साजिश बता रही है। पार्टी प्रवक्ता कुणाल घोष का कहना है कि भाजपा केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है। ममता बनर्जी आज भी बंगाल की जनता की आवाज़ हैं और जनता भाजपा की इस नकारात्मक राजनीति को नकार देगी। वहीं बीते दिनों मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक रैली में कहा है भाजपा बंगाल को बाहर से नियंत्रित करना चाहती है। हम बंगाल की अस्मिता और संघीय ढांचे की रक्षा के लिए लड़ रहे हैं।
पश्चिम बंगाल पर लगातार नजर रखनेवाले राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि भाजपा इसी तरह आक्रामक तेवर बनाए रखती है तो चुनावी मुकाबला बेहद दिलचस्प और कांटे का होगा। सुवेंदु अधिकारी और शमिक भट्टाचार्य की जोड़ी भाजपा को ज़मीनी स्तर पर मज़बूत करने में जुटी है, वहीं ममता बनर्जी अपनी पुरानी रणनीति और जनसंपर्क के सहारे सत्ता बचाने की कोशिश कर रही हैं।
पश्चिम बंगाल का चुनाव केवल सत्ता का संघर्ष नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार बनाम बदलाव, तृणमूल बनाम भाजपा और ममता बनर्जी की राजनीतिक साख की अग्निपरीक्षा बन चुका है। आने वाले महीनों में यह साफ हो जाएगा कि बंगाल की जनता ममता बनर्जी पर एक बार फिर भरोसा जताती है या भाजपा को सत्ता की चाबी सौंपने का मन बना चुकी है।


































