जब कानून के रखवाले ही नियमों और नैतिकता की सीमाएं तोड़ने लगें, तो व्यवस्था पर जनता का भरोसा डगमगाना तय है। कर्नाटक से 19 जनवरी को सामने आई एक घटना ने पूरे देश के पुलिस तंत्र को कठघरे में खड़ा कर दिया है। राज्य के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी और नागरिक अधिकार प्रवर्तन निदेशालय के प्रमुख डीजीपी के. रामचंद्र राव का एक आपत्तिजनक वीडियो सामने आने के बाद उन्हें तत्काल निलंबित कर दिया गया।
यह मामला महज़ एक व्यक्तिगत फिसलन नहीं माना जा रहा, बल्कि उस ‘पावर करप्शन’ की गंभीर तस्वीर पेश करता है, जहां सरकारी दफ्तरों को निजी भोग-विलास का अड्डा बना दिया जाता है। गौरतलब है कि यह पहला मौका नहीं है जब किसी आईपीएस अधिकारी को ऐसे आरोपों के चलते निलंबन या बर्खास्तगी का सामना करना पड़ा हो। इससे पहले भी उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब और अन्य राज्यों में कई वरिष्ठ अधिकारियों पर इसी तरह के आरोप लग चुके हैं।
19 जनवरी 2026 को सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने हड़कंप मचा दिया। इस क्लिप में डीजीपी के. रामचंद्र राव को कथित तौर पर अपनी वर्दी में, अपने ही कार्यालय के भीतर एक नहीं बल्कि कई महिलाओं के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देखा गया। वीडियो में अधिकारी को कुर्सी पर बैठकर एक महिला को गले लगाते और चूमते हुए दिखाया गया है। बताया जा रहा है कि संबंधित महिला अक्सर किसी न किसी काम के सिलसिले में डीजीपी कार्यालय आया-जाया करती थी।
रामचंद्र राव ने इन आरोपों को पूरी तरह नकारते हुए वीडियो को ‘फर्जी’ और ‘डॉक्टर्ड’ करार दिया है। उनका कहना है कि यह उन्हें बदनाम करने की साजिश है। हालांकि, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने मामले की गंभीरता को देखते हुए बिना देर किए जांच के आदेश दिए और अधिकारी को निलंबित कर दिया।
आईपीएस अधिकारियों के निजी आचरण से जुड़े विवाद नए नहीं हैं। राजस्थान कैडर के 2009 बैच के आईपीएस अधिकारी पंकज चौधरी को वर्ष 2019 में केंद्र सरकार ने सेवा से बर्खास्त कर दिया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने पहली पत्नी के रहते दूसरी महिला से संबंध बनाए और उनसे संतान भी हुई। जांच में गंभीर कदाचार साबित होने पर उन्हें अखिल भारतीय सेवा नियमों के उल्लंघन का दोषी मानते हुए बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।
पंजाब पुलिस के पूर्व डीजीपी के.पी.एस. गिल, जिन्हें आतंकवाद के खिलाफ सख़्त कार्रवाई के लिए जाना जाता है, उनका नाम भी एक समय विवादों में घिरा। वर्ष 1996 में उन्हें एक महिला आईएएस अधिकारी की मर्यादा भंग करने के मामले में दोषी ठहराया गया था। इस घटना ने उस दौर में शीर्ष नौकरशाहों के व्यक्तिगत आचरण पर गंभीर सवाल खड़े किए थे।
महाराष्ट्र में भी डीजीपी और एडीजीपी स्तर के कई आईपीएस अधिकारियों के प्रेम-प्रसंग और अनैतिक संबंधों की खबरें समय-समय पर सामने आती रही हैं, जिससे पुलिस बल की साख को नुकसान पहुंचा। वर्ष 2018 में बेंगलुरु ग्रामीण के तत्कालीन एसपी भीमाशंकर गुलेड का वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वह वर्दी में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की पत्नी के साथ आपत्तिजनक हालत में नजर आए थे।
ओडिशा में भी हाल के वर्षों में एक पुलिस अधिकारी और महिला होमगार्ड के बीच प्रेम प्रसंग और उसके बाद हुए विवाद ने काफी सुर्खियां बटोरी थीं। इन तमाम मामलों ने यह साफ कर दिया है कि सत्ता और पद का नशा किसी भी रैंक के अधिकारी को नैतिक पतन की ओर ले जा सकता है।
रामचंद्र राव के मामले में भाजपा सहित विपक्षी दलों ने कड़ा रुख अपनाते हुए इसे अक्षम्य अपराध बताया है। नेताओं का कहना है कि इस तरह की घटनाएं पुलिस विभाग पर जनता के विश्वास को गहरा आघात पहुंचाती हैं। जब न्याय और सुरक्षा का प्रतीक माने जाने वाले कार्यालयों में इस तरह की हरकतें होती हैं, तो पूरी व्यवस्था पर सवाल उठना लाज़मी है।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी कायम है—वर्दी की गरिमा आखिर कब तक ऐसे ‘रंगीन मिज़ाज’ अधिकारियों के हाथों तार-तार होती रहेगी?






































