खबर के मुताबिक बीजेपी राष्ट्रीय युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद अब 35 वर्ष से कम उम्र के कार्यकर्ताओं को दिया जाएगा। विभिन्न प्रदेश युवा मोर्चा के अध्यक्षों की उम्र सीमा 32 वर्ष से कम तय की जा रही है। यह नियम बूथ स्तर से लेकर प्रदेश संगठन तक की सभी महत्वपूर्ण नियुक्तियों पर लागू होने की संभावना है। पदाधिकारियों की उम्र को राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की उम्र के साथ तालमेल बिठाने की तैयारी है, यानी युवा लीडरशिप को पार्टी के टॉप लेवल से जोड़कर एक सशक्त चेन बनाना।
नितिन नवीन खुद पार्टी के इतिहास में सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष बने हैं (45 वर्ष की उम्र में)। वे बिहार के पांच बार के विधायक रह चुके हैं और युवा मोर्चा से अपना सफर शुरू किया था। उनकी नियुक्ति के बाद पार्टी ने स्पष्ट संकेत दिया है कि अब युवा सिर्फ वोटर या कार्यकर्ता नहीं, बल्कि निर्णय लेने वाले लीडर बनेंगे। यह कदम आने वाले विधानसभा चुनावों जैसे असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडू आदि को ध्यान में रखकर लिया गया है, जहां युवा वोटर निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
पार्टी का मानना है कि 30-35 साल के लीडर बेहतर तरीके से युवाओं की भाषा, सोशल मीडिया, डिजिटल कैंपेन और नई चुनौतियों को समझ पाएंगे। बीजेपी का संदेश साफ है – उम्र कोई बाधा नहीं, बल्कि योग्यता और ऊर्जा मायने रखती है। यह बदलाव न केवल संगठन को मजबूत करेगा, बल्कि बीजेपी को एक युवा-केंद्रित, गतिशील पार्टी के रूप में पेश करेगा। आने वाले दिनों में बूथ से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक युवा चेहरों की एक पूरी नई टीम की बौछार देखने को मिल सकती है !



































