भारत सरकार ने 2026 के पद्म पुरस्कारों की घोषणा कर दी है। इस बार दिवंगत अभिनेता धर्मेंद्र समेत 5 लोगों को पद्म विभूषण से नवाजा जाएगा। वहीं 13 लोगों को पद्म भूषण अवॉर्ड दिया जाएगा। साथ ही क्रिकेटर रोहित शर्मा समेत 113 लोगों को पद्मश्री पुरस्कार से नवाजा जाएगा।
उल्लेखनीय है कि ये सम्मान भारत के सर्वोच्च पुरस्कारों में शामिल हैं। ये पुरस्कार तीन श्रेणियों में विभाजित हैं, जिनमें पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री में खास विभूतियों को प्रदान किए जाते हैं। ये सम्मान सामाजिक कार्य, जन-प्रशासन, कला, व्यापार और उद्योग, विज्ञान, खेल, सिविल सेवा, साहित्य और शिक्षा समेत अन्य क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों को दिए जाते हैं।
वहीं, पद्म विभूषण असाधारण और विशिष्ट सेवा के लिए, पद्म भूषण उच्च कोटि की विशिष्ट सेवा के लिए और पद्म श्री किसी भी क्षेत्र में उल्लेखनीय सेवा के लिए प्रदान किए जाते हैं। इन सभी पुरस्कार की घोषणा हर साल गणतंत्र दिवस के मौके पर की जाती है। ये सम्मान भारत के राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक विशेष समारोह में प्रदान किया जाता है।
भोजपुरी लोकगायक भरत सिंह – बिहार भोजपुर जिले के नोनउर गांव निवासी वरिष्ठ भोजपुरी लोकगायक, लोकसंस्कृति के संरक्षक और समाजसेवी भरत सिंह भारती को पद्मश्री पुरस्कार न्हें पिछले लगभग 78 वर्षों से भोजपुरी लोक संगीत, लोक परंपराओं के संरक्षण और समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए किए गए आजीवन, निस्वार्थ योगदान के लिए दिया जा रहा है।
मृदंगम कलाकार थिरुवरूर भक्तवत्सलम – तमिलनाडु के मशहूर थिरुवरूर भक्तवत्सलम इस सम्मान से वे बेहद खुश हैं और इसे अपनी जिंदगी का सबसे यादगार दिन बता रहे हैं। 60 साल से संगीत की दुनिया में एक्टिव भक्तवत्सलम ने कहा कि यह उनके लिए सपने के सच होने जैसा है। हालांकि उनकी भूख अभी शांत नहीं हुई है।
समाजसेवी बुधरी ताती – दंतेवाड़ा जिले के हीरानार गांव की रहने वाली समाजसेवी बुधरी ताती को दशकों तक अबूझमाड़ और दूरस्थ वनांचल इलाकों में शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और नशामुक्ति के लिए किए गए उनके अथक प्रयासों के बाद अब उन्हें पद्मश्री से नवाजा जाएगा।
गफरूद्दीन मेवाती जोगी – अलवर जिले के मेवात क्षेत्र की समृद्ध लोक-संस्कृति को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने वाले गफरूद्दीन मेवाती जोगी भपंग वादन की दुनिया में एक जाना-माना नाम है। विलुप्त होती राजस्थानी लोक कला ‘भपंग’ को नई पहचान देने और उसे जीवित रखने में उनका योगदान अतुलनीय है। लोक संगीत के संरक्षण और प्रचार-प्रसार में उनके दीर्घकालिक समर्पण को देखते हुए पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया जा रहा है।
तगाराम भील – जैसलमेर जिले के मूलसागर गांव के निवासी 62 वर्षीय तगाराम भील ने लोक वाद्य अलगोजा की मधुर धुनों को गांव की चौपालों से निकालकर अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचाया। बेहद सादा जीवन जीने वाले तगाराम भील ने इस सम्मान को अपनी साधना, गुरुजनों के आशीर्वाद और क्षेत्रवासियों की दुआओं का परिणाम बताया है।
विजय अमृतराज – विजय अमृतराज की पहचान ऐसे खिलाड़ी की है, जिन्होंने टेनिस में भारत को पहचान दिलाई है। तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में जन्मे विजय अमृतराज ने 2 बार विंबलडन और US ओपन के क्वार्टर फाइनल तक का सफर तय किया था। वह इस साल खेल जगह से पद्म भूषण हासिल करने वाली एकमात्र हस्ती हैं।
हरमनप्रीत कौर – भारतीय महिला टीम ने बीते साल पहली बार आईसीसी वनडे वर्ल्ड कप का खिताब अपने नाम किया। हरमनप्रीत कौर की अगुवाई में टीम पहली बार आईसीसी ट्रॉफी जीतने में सफल रही। हरमनप्रीत की अगुवाई में टीम ने शानदार प्रदर्शन किया और खिताब के सूखे को खत्म किया।
पर्यावरण कार्यकर्ता मोहन नागर – मध्य प्रदेश में जल संरक्षण, भू-जल संवर्धन और समग्र पर्यावरण जागरूकता के क्षेत्र में उनके दशकों लंबे योगदान ने न केवल प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को मजबूती दी है, बल्कि समाज को पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनाने में भी अहम भूमिका निभाई है।
आर्मिडा फर्नांडिस – महाराष्ट्र की प्रख्यात बाल एवं नवजात शिशु रोग विशेषज्ञ। मुंबई में एशिया के पहले मानव दूध बैंक की स्थापना की। इससे शिशुओं के जीवित रहने की संभावनाओं में व्यापक सुधार देखने को मिला। राज्य में 2,000 से अधिक नर्सों एवं डॉक्टरों को प्रशिक्षित किया और शिशु मृत्यु दर को 70 फीसदी से घटाकर 12 फीसदी के स्तर पर लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्हें इंडियन नियोनेटोलॉजी (भारतीय नवजात शिशु चिकित्सा) की मां के रूप में भी जाना जाता है। मातृ स्वास्थ्य पर भी काम करती हैं।
रघुपत सिंह – उत्तर प्रदेश के रघुपत सिंह कृषि क्षेत्र और खासतौर पर बीज संरक्षण में नवाचार के लिए विख्यात हैं। पांच दशक से अधिक समय के अपने खेती-किसानों के अनुभवों और नई तकनीकी के इस्तेमाल से 400 से अधिक नए किस्म के पौधे विकसित कर चुके हैं। इसमें 1.5 मीटर लंबी लौकी भी शामिल है। 32 देसी किस्मों के संरक्षण के साथ नई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर खेती-किसानी को मुनाफा लायक बनाया और कमाई बढ़ाकर लाखों किसानों के जीवन को बेहतर करने में अहम भूमिका निभाई।
चिरंजी लाल यादव – पीतल नगरी मुरादाबाद के चिरंजी लाल यादव अपनी कारीगरी और कड़ी मेहनत से पीतल उत्पादों को नया स्वरूप देने के लिए मशहूर हैं। पीतल पर अपने व्यापक कार्यों के लिए उन्हें दुनियाभर में पहचान मिली। गुरु-शिष्य परंपरा को कायम रखते हुए उन्होंने युवाओं को प्रशिक्षित करने, परंपरागत कार्यों को संरक्षित करने और समाज के कमजोर वर्गों को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। पीतल हैंडीक्राफ्ट को आगे बढ़ाने के साथ उन्होंने बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका।
हली वार – रबड़ प्रजाति के पेड़ फिकस की जड़ों के संरक्षण में अहम भूमिका। मेघालय के पूर्वी खासी जिले के हली वार जब 10 वर्ष के थे, तभी आर्द्र, मानसूनी जलवायु में भी पनपने वाले फिकस इलास्टिका की जड़ों को बुनकर 600 वर्षों तक टिकने वाला पुल बनाया था। वह ग्रामीणों के साथ मिलकर पर्यावरण संरक्षण पर भी काम करते हैं।































