दिल्ली पुलिस की विजिलेंस शाखा ने 2011 बैच के आईपीएस अधिकारी शंकर चौधरी के खिलाफ गंभीर आरोपों के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। यह एफआईआर बाराखंभा रोड स्थित विजिलेंस थाना में FIR संख्या 02/2026 के तहत दर्ज की गई है। मामला बिना अनुमति छापेमारी करने, एक विदेशी नागरिक को अवैध रूप से हिरासत में रखने और संपत्ति में हेराफेरी जैसे गंभीर आरोपों से जुड़ा है।
विजिलेंस शाखा ने यह कार्रवाई गृह मंत्रालय के निर्देश पर की गई विस्तृत जांच के बाद की है। जांच में आरोपों को प्रथम दृष्टया सही पाए जाने के बाद आईपीएस अधिकारी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का फैसला लिया गया।
विजिलेंस सूत्रों के अनुसार, यह मामला आईपीएस अधिकारी शंकर चौधरी के पिछले कार्यकाल के दौरान कथित अनियमितताओं से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि 21 से 30 नवंबर 2023 के बीच उन्होंने बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के छापेमारी की, एक विदेशी नागरिक को अवैध रूप से हिरासत में रखा और जब्त संपत्ति के साथ कथित रूप से हेराफेरी की।
सूत्रों के मुताबिक, इन आरोपों को लेकर गृह मंत्रालय (MHA) के पास शिकायतें पहुंची थीं। इसके बाद मंत्रालय ने मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए। दिल्ली पुलिस की विजिलेंस शाखा ने दस्तावेजों, गवाहों और अन्य साक्ष्यों की गहन पड़ताल की। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर विजिलेंस शाखा ने आरोपों को प्रथम दृष्टया सही मानते हुए आईपीएस अधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की।
शंकर चौधरी एजीएमयूटी (AGMUT) कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं। एजीएमयूटी कैडर में अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम, केंद्र शासित प्रदेशों सहित दिल्ली जैसे संवेदनशील क्षेत्र शामिल होते हैं, जहां अधिकारियों की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है।
विजिलेंस अधिकारियों के अनुसार, एफआईआर दर्ज होने के बाद अब मामले में आगे की कानूनी जांच की जाएगी। जरूरत पड़ने पर संबंधित अधिकारियों और गवाहों से पूछताछ, दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच और अन्य कानूनी प्रक्रियाएं अपनाई जाएंगी। मामले में आगे विभागीय कार्रवाई की संभावना से भी इनकार नहीं किया गया है।
प्रशासनिक हलकों में इस कार्रवाई को सरकारी तंत्र में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ जांच और एफआईआर दर्ज होना यह संकेत देता है कि अनियमितताओं के मामलों में रैंक या पद आड़े नहीं आएगा। फिलहाल, आईपीएस अधिकारी शंकर चौधरी की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।































