दिल्ली के जनकपुरी इलाके में 25 वर्षीय कमल ध्यानी की मौत का मामला= है कि सब-कॉन्ट्रैक्टर राजेश प्रजापति को हादसे की जानकारी रात में ही मिल गई थी, लेकिन उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की। पुलिस जांच में सामने आया कि कमल ध्यानी गुरुवार रात (5 फरवरी 2026) करीब 12 बजे के आसपास दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) द्वारा खुदवाए गए 4.5-5 मीटर गहरे खुले गड्ढे में बाइक सहित गिर गए थे। गड्ढे में कोई बैरिकेडिंग, चेतावनी बोर्ड, लाइटिंग या सुरक्षा गार्ड नहीं था।कमल एक प्राइवेट बैंक (HDFC) में असिस्टेंट मैनेजर थे और माता-पिता की शादी की सालगिरह मनाने घर जा रहे थे। उन्होंने दोस्त को आखिरी कॉल कर कहा था कि “10-15 मिनट में पहुंच जाऊंगा”, लेकिन उसके बाद संपर्क टूट गया। परिवार ने सुबह 8 बजे तक सर्च किया, तब जाकर उनका शव और बाइक गड्ढे से बरामद हुई। पोस्टमॉर्टम में मौत की वजह चोटें और डूबना/घुटन बताई गई।
नया खुलासा और पुलिस एक्शन
दिल्ली पुलिस (वेस्ट डीसीपी शरद भसीन) ने बताया कि हादसे के तुरंत बाद एक चश्मदीद (विपिन सिंह) ने गार्ड और मजदूर योगेश को सूचित किया। योगेश ने रात 12:22 बजे सब-कॉन्ट्रैक्टर राजेश प्रजापति (47 वर्ष, त्रिनगर निवासी) को फोन किया। राजेश मौके पर पहुंचे, कमल और बाइक को गड्ढे में देखा, लेकिन मदद नहीं की और चले गए। पुलिस को सूचना सुबह मिली, जबकि राजेश को घंटों पहले पता था।
दिल्ली पुलिस (वेस्ट डीसीपी शरद भसीन) ने बताया कि हादसे के तुरंत बाद एक चश्मदीद (विपिन सिंह) ने गार्ड और मजदूर योगेश को सूचित किया। योगेश ने रात 12:22 बजे सब-कॉन्ट्रैक्टर राजेश प्रजापति (47 वर्ष, त्रिनगर निवासी) को फोन किया। राजेश मौके पर पहुंचे, कमल और बाइक को गड्ढे में देखा, लेकिन मदद नहीं की और चले गए। पुलिस को सूचना सुबह मिली, जबकि राजेश को घंटों पहले पता था।
इस लापरवाही पर जनकपुरी थाने में FIR दर्ज की गई (FIR No. 35/2026), जिसमें भारतीय न्याय संहिता की धारा 105 (गैर-इरादतन हत्या) के तहत मामला बनाया गया। राजेश प्रजापति को शनिवार (7 फरवरी 2026) को गिरफ्तार कर लिया गया। मजदूर योगेश फरार है, उसकी तलाश जारी है। दिल्ली जल बोर्ड के 3 अधिकारियों को सस्पेंड किया गया है। जांच में और गिरफ्तारियां होने की संभावना है, जिसमें मुख्य कॉन्ट्रैक्टर, इंजीनियर और साइट मैनेजर शामिल हो सकते हैं।परिवार का गुस्सा
कमल के पिता और चाचा ने कहा, “अगर रात में ही मदद की जाती तो जान बच सकती थी।” परिवार ने डीजेबी की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया है। यह मामला दिल्ली में खुले गड्ढों की समस्या को फिर उजागर कर रहा है, जहां सुरक्षा मानकों की अनदेखी आम है।
कमल के पिता और चाचा ने कहा, “अगर रात में ही मदद की जाती तो जान बच सकती थी।” परिवार ने डीजेबी की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया है। यह मामला दिल्ली में खुले गड्ढों की समस्या को फिर उजागर कर रहा है, जहां सुरक्षा मानकों की अनदेखी आम है।

























