उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन एक असामान्य घटना सामने आई। सदन में भाजपा के प्रोफेसर श्याम बिहारी लाल और सपा के विजय सिंह गौड़ के निधन पर शोक प्रस्ताव पारित किया जा रहा था। इसी संवेदनशील माहौल के दौरान भाजपा विधायक चौधरी बाबू लाल का मोबाइल फोन एक-दो बार बज गया, जिससे सदन की गरिमा प्रभावित हुई।
इस पर विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने इसे कार्यवाही में बाधा मानते हुए तुरंत मार्शल टीम को निर्देश दिया और विधायक का मोबाइल फोन जब्त करा लिया। विधानसभा के नियमों के मुताबिक सदन के अंदर मोबाइल फोन का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित है और उसे साइलेंट मोड पर रखना भी अनिवार्य है। नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान है।
यह घटना सदन में अनुशासन और मर्यादा बनाए रखने के नियमों की अहमियत को रेखांकित करती है, खासकर ऐसे संवेदनशील मौकों पर जब सभी सदस्यों से पूरी गंभीरता और सम्मान बनाए रखने की अपेक्षा होती है। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब आम लोगों से नियमों का पालन कराने की अपेक्षा की जाती है, तो जनप्रतिनिधियों से इससे ज्यादा सावधानी की उम्मीद स्वाभाविक है।



























