समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कानून-व्यवस्था, भ्रष्टाचार और धार्मिक विवादों को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर अब तक का सबसे बड़ा हमला बोला है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अखिलेश यादव ने जगतगुरु रामभद्राचार्य और शंकराचार्य से जुड़े विवादों पर सरकार को आड़े हाथों लिया।
अखिलेश यादव ने बेहद तल्ख लहजे में कहा कि जगतगुरु रामभद्राचार्य के खिलाफ दर्ज धारा 420 के मुकदमे को वापस लेना उनकी बड़ी भूल थी। उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता रामभद्राचार्य जी का शिष्य है। मुझसे गलती हुई कि मैंने उनके खिलाफ मुकदमा वापस लिया, मुझे उन्हें जेल भेज देना चाहिए था। हालांकि, किसी पर व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं होनी चाहिए, लेकिन भाजपा आज शंकराचार्य को अपमानित करने के लिए 20 साल पुरानी घटनाएं खोदकर ला रही है।
सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि कड़ाके की ठंड में शंकराचार्य को धरने पर बैठने को मजबूर किया गया और सनातनी परंपरा के विरुद्ध उन्हें स्नान करने से भी रोका गया। उन्होंने कहा कि भाजपा आज शंकराचार्य से ‘सर्टिफिकेट’ मांग रही है, जो हास्यास्पद है।
विकास के दावों पर सवाल उठाते हुए अखिलेश ने कहा कि राज्य में विकास के नाम पर सिर्फ लूट मची है। गोमती और हिंडन की सफाई का काम रुक गया है क्योंकि सरकार को विकास से नफरत है। अखिलेश ने आरोप लगाया कि बुंदेलखंड से लखनऊ तक अंडरग्राउंड पाइपलाइन नहीं, बल्कि “भ्रष्टाचार की पाइपलाइन” बिछाई जा रही है। उन्होंने तंज कसा कि बुलेट ट्रेन की लागत एक करोड़ से बढ़कर दो करोड़ हो गई है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रस्तावित जापान यात्रा पर चुटकी लेते हुए सपा प्रमुख ने कहा कि “किसी चापलूस अधिकारी का जापान जाने का मन होगा, तो उसने मुख्यमंत्री जी से कह दिया कि जापान चलो। मुख्यमंत्री बिष्ट जी को पता ही नहीं कि क्या बोलना है। वह जापान जा रहे हैं, लेकिन क्योटो नहीं जा रहे (जो पहले मॉडल बनाने की बात हुई थी)।”
अखिलेश यादव ने भाजपा पर फर्जी वीडियो और सांप्रदायिक राजनीति के जरिए नफरत फैलाने का आरोप लगाया। अपने निजी जीवन का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि उनके घर में 45 गाय हैं, लेकिन वे इसका दिखावा नहीं करते। भाजपा के चुनाव चिन्ह पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने अंत में कहा, “बीजेपी हर जगह गंदगी करना चाहती है, क्योंकि गंदगी होगी तभी तो कमल खिलेगा।”



















