पश्चिम बंगाल की सबसे हाई-प्रोफाइल सीट भवानीपुर में चुनावी पारा सातवें आसमान पर है। यहाँ मुकाबला अब नीतियों से निकलकर ‘चॉकलेट’ तक जा पहुँचा है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सिपहसालार और कोलकाता के पूर्व मेयर फिरहाद हकीम एक ऐसी मुसीबत में फंस गए हैं, जो उनके और पार्टी के लिए गले की हड्डी बन सकती है।
मंगलवार को फिरहाद हकीम चेतला इलाके में ममता बनर्जी के लिए घर-घर जाकर वोट मांग रहे थे। इसी दौरान एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें हकीम अपने कुर्ते की जेब से चॉकलेट निकालकर बच्चों को बांटते नजर आ रहे हैं। दिखने में यह एक मासूम सा व्यवहार लग सकता है, लेकिन चुनाव के समय इसे ‘वोटर प्रलोभन’ के चश्मे से देखा जा रहा है।
बीजेपी इस मौके को हाथ से जाने नहीं देना चाहती। विपक्ष का तर्क है कि बच्चों को चॉकलेट देना असल में उनके माता-पिता (वोटरों) को प्रभावित करने की एक सोची-समझी रणनीति है।
बीजेपी सूत्रों कि मानें तो चुनाव प्रचार में किसी भी तरह की सामग्री या उपहार बांटना आदर्श आचार संहिता का सीधा उल्लंघन है। स्टेट युनिट इसकी शिकायत चुनाव आयोग से करने जा रहा है।
क्या एक चॉकलेट किसी नेता को मुश्किल में डाल सकती है? चुनाव आयोग के नियम तो यही कहते हैं:
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लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम (RPA), 1951: इसकी धारा 123 के तहत किसी भी तरह का उपहार देना ‘रिश्वतखोरी’ और ‘भ्रष्ट आचरण’ की श्रेणी में आता है।
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भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023: चुनाव में अनुचित प्रभाव डालने की कोशिश पर कड़ी धाराओं में मामला दर्ज हो सकता है।
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बच्चों का इस्तेमाल: आयोग की फरवरी 2024 की गाइडलाइन के अनुसार, चुनाव प्रचार के दौरान बच्चों से जुड़ी किसी भी गतिविधि पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति है।
वहीं, तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है। पार्टी का कहना है कि फिरहाद हकीम का बच्चों के प्रति यह केवल मानवीय स्नेह था और इसे राजनीति से जोड़ना विपक्ष की हताशा को दर्शाता है।
भवानीपुर की संवेदनशीलता को देखते हुए चुनाव आयोग की निगरानी टीम वीडियो की जांच कर रही है। अगर इसे ‘वोट खरीदने की कोशिश’ माना गया, तो फिरहाद हकीम को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया जा सकता है। अब सवाल यह है कि क्या चुनाव आयोग इस ‘मीठी हरकत’ पर कड़ा एक्शन लेगा या इसे मानवीय आधार पर छोड़ देगा? भवानीपुर की जंग अब और भी दिलचस्प हो गई है।















