खास बातें (Key Highlights):
- दिल्ली की 898 सक्रिय सोसाइटियों में से केवल 101 के पास ही वैध फायर NOC.
- करीब 18 लाख लोग बिना सुरक्षा मानकों वाली इमारतों में रहने को मजबूर.
- मालवीय नगर होटल अग्निकांड ने खोली सुरक्षा की पोल, नियमों को ताक पर रखकर चल रहे थे 25 कमरे.
- 15 मीटर से ऊंची बहुमंजिला इमारतों के लिए फायर NOC कानूनी रूप से अनिवार्य.
राजधानी दिल्ली में एक बार फिर फायर सेफ्टी को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। दिल्ली फायर विभाग के हालिया आंकड़ों के मुताबिक, शहर की करीब 90 प्रतिशत कोऑपरेटिव ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियों के पास मान्य ‘फायर नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ (NOC) नहीं है। इसका सीधा मतलब यह है कि दिल्ली के करीब 18 लाख निवासी हर वक्त एक बड़े खतरे के बीच रहने को मजबूर हैं। हाल ही में दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर स्थित एक होटल में लगी भीषण आग ने इस सुलगती हुई समस्या पर फिर से सबका ध्यान खींच लिया है।
मालवीय नगर अग्निकांड ने खोली सुरक्षा दावों की पोल
मालवीय नगर के एक होटल में लगी घातक आग ने 21 लोगों की जान ले ली। इस हादसे ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि राजधानी में सुरक्षा उल्लंघनों पर तभी बात होती है, जब कोई बड़ा हादसा हो जाता है।
शुरुआती जांच में जो खुलासे हुए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं:
- नियमों का उल्लंघन: इस संपत्ति को केवल 6 कमरों के संचालन की इजाजत थी, लेकिन यहां कथित तौर पर 25 कमरे चलाए जा रहे थे।
- रजिस्ट्रेशन का खेल: यह होटल दिल्ली की ‘बेड एंड ब्रेकफास्ट’ योजना के तहत होम स्टे के रूप में रजिस्टर्ड था, जिसकी आड़ में नियमों को ताक पर रखा गया।
आंकड़ों की जुबानी: सिर्फ 11% सोसाइटियां ही सुरक्षित
दिल्ली फायर सर्विसेज द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में सुरक्षा की स्थिति बेहद चिंताजनक है:
| कुल सक्रिय सोसाइटियां | वैध फायर NOC वाली सोसाइटियां | आवेदन खारिज (कमियों के कारण) | बिना वैध क्लीयरेंस/आवेदन न करने वाली |
| 898 | 101 (केवल 11%) | 73 | 724 |
फायर अधिकारियों का कहना है कि बार-बार चेतावनी दिए जाने के बावजूद ज्यादातर सोसाइटियां या तो फायर सेफ्टी क्लीयरेंस के लिए आवेदन ही नहीं करतीं या समय पर अपने प्रमाणपत्रों का नवीनीकरण (Renew) नहीं करातीं।
इन 24 से ज्यादा मानकों पर परखी जाती है सुरक्षा
अधिकारियों के अनुसार, 15 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली सभी बहुमंजिला इमारतों के लिए वैध फायर NOC होना कानूनी रूप से अनिवार्य है। फायर NOC देने से पहले दो दर्जन से अधिक कड़े मानकों की जांच की जाती है, जिनमें शामिल हैं:
- आपातकालीन निकास (Emergency Exits) और सीढ़ियां
- वेंटिलेशन सिस्टम और छत तक आसान पहुंच
- अग्निशमन उपकरण और काम करने वाली पानी की मोटरें
- बिजली यूनिट्स की स्थिति और हाई-टेंशन तारों की दूरी
- बेसमेंट निकास और लिफ्ट सिस्टम
अधिकांश सोसाइटियां इन बुनियादी मानकों को भी पूरा नहीं कर पा रही हैं।
किस इलाके में हैं कितनी सोसाइटियां?
केंद्र सरकार के सहकारिता मंत्रालय के राष्ट्रीय डेटाबेस के अनुसार, दिल्ली में कुल 898 सक्रिय कोऑपरेटिव ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियां हैं, जिनका प्रबंधन रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों (RWA) के पास है। इनमें करीब 18 से 20 लाख लोग रहते हैं।
इलाकेवार स्थिति:
- दक्षिण-पश्चिम दिल्ली: सबसे ज्यादा 317 सोसाइटियां
- पूर्वी दिल्ली: 227 सोसाइटियां
- उत्तर-पश्चिम दिल्ली: 166 सोसाइटियां
इनमें से लगभग 90% सोसाइटियों के पास फायर क्लीयरेंस न होना यह साफ करता है कि दिल्ली की एक बड़ी आबादी इस समय बारूद के ढेर पर बैठी है, और प्रशासन को किसी बड़े हादसे का इंतजार किए बिना इस पर सख्त कदम उठाने की जरूरत है।