राजधानी दिल्ली में म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ऑफ दिल्ली (MCD) के अधिकारियों द्वारा भ्रष्टाचार और सरकारी रिकॉर्ड्स में हेरफेर का एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है। शाहदरा नॉर्थ जोन के झिलमिल इंडस्ट्रियल एरिया में अवैध निर्माण के खिलाफ की गई सीलिंग की कार्रवाई को न सिर्फ कागजों से गायब कर दिया गया, बल्कि अवैध रूप से प्रॉपर्टी की डी-सीलिंग (सील खोलना) कर वहां नया बिजली मीटर तक लगवा दिया गया।अब इस पूरे घालमेल के खिलाफ सेंट्रल विजिलेंस कमिशन (CVC) में एक गंभीर शिकायत दर्ज कराई गई है, जिससे MCD महकमे में हड़कंप मच गया है ।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, दिल्ली के शाहदरा स्थित झिलमिल, फ्रेंड्स कॉलोनी इंडस्ट्रियल एरिया (मेन जीटी रोड, अंडरपास के पास) में स्थित प्रॉपर्टी नंबर 340/6 और 340/7 में बेसमेंट, ग्राउंड फ्लोर से लेकर तीसरी मंजिल तक भारी अवैध निर्माण किया गया था। इस मामले में MCD ने 31 अक्टूबर 2023 को बुकिंग (फाइल नंबर 156/B-1/UC/SH-N/2023) की थी और मई 2025 में बकायदा वेकेशन नोटिस (Vacation Notice u/s 349) भी जारी किया गया था।
सरकारी रिकॉर्ड में ‘सीलिंग’, आरटीआई में ‘नॉट एप्लीकेबल’!
दस्तावेजों के मुताबिक, 29 मई 2025 को दिल्ली पुलिस की जनरल डायरी (GD Entry No. 0045A) में बकायदा रिकॉर्ड दर्ज है कि पुलिस बल सीलिंग और डेमोलिशन (तोड़फोड़) की कार्रवाई के लिए मौके पर गया था इसके अगले ही दिन यानी 30 मई 2025 को मीडिया रिपोर्ट्स में भी इस प्रॉपर्टी के सील होने की खबर आई थी। लेकिन जब शिकायतकर्ता मोहित कुमार भाटी ने सूचना का अधिकार (RTI) के तहत इस सीलिंग और कार्रवाई का ब्योरा मांगा, तो MCD अधिकारियों ने सफ़ेद झूठ बोलते हुए जवाब दिया कि “इस कार्यालय द्वारा उक्त प्रॉपर्टी को कभी सील ही नहीं किया गया, इसलिए मांगी गई जानकारी नॉट एप्लीकेबल (लागू नहीं) है”
लोकल कमिश्नर की जांच में खुला ‘अवैध डी-सीलिंग’ का राज
मामले की परतें तब खुलीं जब 17 दिसंबर 2025 को एक मामले में कोर्ट द्वारा नियुक्त लोकल कमिश्नर ने मौके का मुआयना किया । कमिश्नर की रिपोर्ट में पाया गया कि मौके पर कोई आधिकारिक सील (Seal) मौजूद नहीं थी। मुख्य दरवाजे के पास पीले रंग का रिबन लगा था जिसपर ‘Don’t Tamper’ (छेड़छाड़ न करें) लिखा था और MCD के फटे हुए नोटिस चिपके थे । सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि निरीक्षण के दौरान वहां कोई बिजली मीटर नहीं था, लेकिन सीलिंग की आधिकारिक कार्रवाई गायब होने के बाद रहस्यमयी तरीके से वहां एक नया बिजली मीटर स्थापित कर दिया गया।
दो प्रॉपर्टी नंबरों (340/6 और 340/7) का चक्रव्यूह
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि MCD के भ्रष्ट अधिकारियों ने जानबूझकर कागजी कार्रवाई में प्रॉपर्टी नंबर 340/6 और 340/7 का घालमेल किया । यह हेरफेर इसलिए की गई ताकि कानूनी कार्रवाई को उलझाया जा सके, सील को चुपके से खोला जा सके और ऊपर बैठे आला अधिकारियों की आंखों में धूल झोंकी जा सके ।
CVC से स्वतंत्र जांच और सख्त एक्शन की मांग
शिकायतकर्ता ने देश की सबसे बड़ी सतर्कता संस्था ‘केंद्रीय सतर्कता आयोग’ (CVC) का दरवाजा खटखटाते हुए 29 अप्रैल 2026 को एक आधिकारिक शिकायत सौंपी है । इस शिकायत में मांग की गई है कि MCD शाहदरा (नॉर्थ) जोन के संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार, पद के दुरुपयोग और रिकॉर्ड की जालसाजी के लिए स्वतंत्र विजिलेंस जांच शुरू की जाए। झूठा आरटीआई जवाब देने वाले पब्लिक इन्फॉर्मेशन ऑफिसर (PIO) पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। सीलिंग से जुड़े असली और मूल रिकॉर्ड को जब्त कर जांच के दायरे में लिया जाए। अब देखना यह होगा कि आरटीआई (RTI) को ठेंगा दिखाने वाले और सीलबंद इमारतों को अवैध रूप से बैकडोर से खोलने वाले MCD के इन रसूखदार अधिकारियों पर CVC का डंडा कब चलता है।
