2027 चुनाव के लिए बीजेपी का चक्रव्यूह क्या है?

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को फतह करने के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अभी से अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. लोकसभा चुनाव 2024 के अनुभव से सबक लेते हुए बीजेपी इस बार संगठन और जमीन पर कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती. ‘मिशन यूपी 2027’ के तहत पार्टी ने सूबे में अब तक के सबसे बड़े स्तर पर प्रचार अभियान और सांगठनिक फेरबदल की रूपरेखा तैयार कर ली है. सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के मुताबिक, अगले महीने यानी जुलाई से बीजेपी अपने इस महाअभियान का शंखनाद करने जा रही है. इस पूरे अभियान की कमान खुद बीजेपी के ‘चाणक्य’ और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह संभालने जा रहे हैं।

गृहमंत्री अमित शाह जुलाई महीने से उत्तर प्रदेश के ताबड़तोड़ दौरे शुरू करेंगे. इस दौरान वह यूपी को संगठनात्मक रूप से बांटे गए 6 क्षेत्रीय इकाइयों में खुद उतरेंगे और जोन वाइज व डिस्ट्रिक्ट वाइज बड़ी समीक्षा बैठकें करेंगे. शाह का यह दौरा उत्तर प्रदेश के राजनीतिक भूगोल को पूरी तरह मथने के लिए डिजाइन किया गया है. जल्द ही गृहमंत्री के इन दौरों की तारीखों का आधिकारिक ऐलान कर दिया जाएगा. अमित शाह के अलावा पार्टी के कई अन्य राष्ट्रीय और राज्य स्तर के वरिष्ठ नेता भी प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में लगातार डेरा डाले रहेंगे.

पश्चिम क्षेत्र : शाह के दौरे की शुरुआत यहीं से होगी. किसान आंदोलन और जाट-मुस्लिम समीकरणों को बेअसर करने के लिए इस क्षेत्र पर विशेष फोकस है. इस दौरे में देवबंद एक बेहद अहम पड़ाव होने जा रहा है, जिससे ध्रुवीकरण और राष्ट्रवाद के नैरेटिव को धार दी जा सके.

ब्रज क्षेत्र : आगरा-मथुरा के इस गढ़ में दलित और ओबीसी वोट बैंक को दोबारा पूरी तरह बीजेपी पाले में लाने की रणनीति तैयार होगी.

कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र : इस क्षेत्र में विकास कार्यों और डिफेंस कॉरिडोर जैसी उपलब्धियों के सहारे जनता तक पहुंचा जाएगा.

अवध क्षेत्र : राजधानी लखनऊ और अयोध्या के आसपास की इस बेल्ट में पिछले कुछ समीकरणों को दुरुस्त करने के लिए शाह खुद कमान संभालेंगे.

काशी क्षेत्र : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाले इस रीजन में शाह कार्यकर्ताओं में नया जोश भरेंगे.

गोरखपुर क्षेत्र : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस अभेद्य किले में संगठन और सरकार के बीच का तालमेल और मजबूत किया जाएगा.

इस बार बीजेपी का प्रचार अभियान पूरी तरह से प्रो-इंकंबेंसी यानी विकास और सुशासन पर केंद्रित होगा. बीजेपी कुछ नैरेटिव के साथ जनता के बीच जाएगी. इनमें होंगे केंद्र की मोदी सरकार के 12 साल का बेदाग कार्यकाल. इसमें देश का इंफ्रास्ट्रक्चर, वैश्विक साख और गरीब कल्याण योजनाएं शामिल रहेंगी. साथ ही यूपी की योगी सरकार का 10 साल का भयमुक्त प्रशासन की उपलब्धि भी गिनाई जाएंगी. कानून व्यवस्था का ‘यूपी मॉडल’, माफियाओं का खात्मा और औद्योगिक विकास इस एजेंडे में होगा.

अमित शाह की इस शुरुआती और आक्रामक घेराबंदी ने समाजवादी पार्टी (SP) और कांग्रेस के ‘इंडिया (INDIA Alliance) गठबंधन के लिए खतरे की घंटी बजा दी है. इसके पीछे मुख्य रूप से तीन कारण हैं.

समय से पहले घेराबंदी के तहत बीजेपी ने सालभर पहले ही अपनी चुनावी मशीनरी को एक्टिव कर दिया है. जब तक विपक्ष संभलेगा, अमित शाह बूथ स्तर तक का चक्रव्यूह तैयार कर चुके होंगे.

सोशल इंजीनियरिंग को ध्वस्त करने की रणनीति पर भी बीजेपी का फोकस होगा. सपा-कांग्रेस का पूरा दारोमदार PDA यानि पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक और जातिगत नैरेटिव पर है. शाह ने पश्चिम से लेकर पूर्व तक जिन 6 क्षेत्रों का खाका खींचा है, वे सीधे तौर पर इन जातियों के गढ़ हैं.

देवबंद जैसे क्षेत्रों से शुरुआत कर बीजेपी विपक्ष के मुस्लिम, यादव, जाट या मुस्लिम-दलित गठजोड़ में सेंध लगाने की तैयारी में है.

विपक्ष बेरोजगारी और स्थानीय मुद्दों पर सरकार को घेरने की सोच रहा है, लेकिन बीजेपी 12 साल के मोदी राज और 10 साल के भयमुक्त योगी राज का ऐसा रिपोर्ट कार्ड सामने रख रही है, जिसका तोड़ ढूंढना विपक्ष के लिए बेहद पेचीदा होने वाला है.

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