खास बातें (Highlights):
- गोवा के अवैध लौह अयस्क (Iron Ore) खनन मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) का बड़ा एक्शन।
- सलगांवकर (AVS) ग्रुप की भारत और सिंगापुर में मौजूद 1023.85 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क।
- ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स (BVI) की शेल कंपनियों के जरिए चीन को महंगा बेचा गया था लोहा।
- अवैध खनन और विदेशी कारोबार से कुल ₹5,237.84 करोड़ की काली कमाई का आरोप।
गोवा में हुए बहुचर्चित अवैध आयरन ओर (लौह अयस्क) खनन और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने सलगांवकर (AVS) ग्रुप और उससे जुड़े प्रमोटरों पर शिकंजा कसते हुए 1,023.85 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच (कुर्क) कर दिया है।
ED के मुताबिक, यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए की गई है, जिसके तार भारत से लेकर सिंगापुर और ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स (BVI) तक फैले हुए हैं।
भारत और सिंगापुर में फैली संपत्तियां जब्त
जांच एजेंसी द्वारा जारी आदेश के तहत जब्त की गई संपत्तियों में भारत में मौजूद 99 अचल संपत्तियां और सिंगापुर में स्थित 31 अचल संपत्तियां शामिल हैं। इसके अलावा समूह की भारतीय कंपनियों के शेयर्स को भी कुर्क किया गया है।
शेल कंपनियों के जरिए चीन को बेचा लोहा, कमाया बंपर मुनाफा
ED की जांच में इस पूरे घोटाले के काम करने के तरीके (Modus Operandi) का सनसनीखेज खुलासा हुआ है:
- अवैध माइनिंग: सलगांवकर ग्रुप ने साल 2007 से 2012 के बीच गोवा में 10 माइनिंग लीज का संचालन कर बड़े पैमाने पर अवैध खनन किया।
- कागजों पर कम कीमत: इस अवैध लौह अयस्क को बेहद कम दामों पर ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स (BVI) में बनाई गई अपनी ही फर्जी (शेल) कंपनियों को बेच दिया गया।
- चीन कनेक्शन: बाद में इन्हीं शेल कंपनियों के जरिए उसी आयरन ओर को चीन के खरीदारों को बेहद ऊंची कीमतों पर बेचा गया। इस चालाकी से ग्रुप ने करीब 2,744.89 करोड़ रुपये का अतिरिक्त मुनाफा कमाया।
5,000 करोड़ से ज्यादा की लॉन्ड्रिंग: ED के अनुसार, अवैध खनन और इस विदेशी मुनाफे को मिलाकर कुल काली कमाई लगभग 5,237.84 करोड़ रुपये रही। इस रकम को विदेशों में कई स्तरों पर घुमाया गया (लेयरिंग की गई) और भारी निवेश कर संपत्तियां खरीदी गईं। कुछ फंड को शेयर पूंजी के रूप में वापस भारत भी लाया गया।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शुरू हुई थी जांच
इस मामले की शुरुआत गोवा पुलिस की सीआईडी क्राइम ब्रांच द्वारा दर्ज एफआईआर (FIR) के आधार पर हुई थी। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने 2014 और 2018 के अपने ऐतिहासिक फैसलों में साफ कर दिया था कि 22 नवंबर 2007 के बाद गोवा में नए खनन पट्टे जारी होने तक की गईं सभी खनन गतिविधियां पूरी तरह अवैध थीं।
ED के सूत्रों का कहना है कि मामले की गहराई से जांच जारी है और आने वाले दिनों में कुछ और बड़े रसूखदारों के नाम सामने आ सकते हैं।