वेंटिलेटर पर एम्बुलेंस से परीक्षा देने पहुंची कोलकाता की जांबाज सृष्टि

देशभर में आयोजित NEET UG 2026 परीक्षा में इस साल 22 लाख से अधिक स्टूडेंट्स शामिल हुए। परीक्षा के इस महाकुंभ के बीच कोलकाता की एक छात्रा सृष्टि दुबे (रोल नंबर 4608306477) की कहानी इस समय पूरे देश में चर्चा और प्रेरणा का विषय बन गई है। मौत के मुंह से बाहर निकलकर और गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद सृष्टि ने जो जज्बा दिखाया, उसने साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों तो कोई भी बाधा आपको रोक नहीं सकती।

हादसे में टूटीं 9 पसलियां, वेंटिलेटर पर लड़ रही थीं जिंदगी की जंग

सृष्टि दुबे को कोलकाता के ढाकुरिया स्थित बिनोदिनी गर्ल्स हाई स्कूल (सेंटर कोड- 4608306) में नीट परीक्षा देनी थी। लेकिन परीक्षा से ठीक पहले, 14 जून को उनका एक गंभीर सड़क हादसा हो गया। यह एक्सीडेंट इतना भयानक था कि सृष्टि की नौ पसलियां टूट गईं और उनके फेफड़ों (Lungs) को भी गंभीर नुकसान पहुंचा। उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी बड़ी सर्जरी हुई और कई दिनों तक वह वेंटिलेटर पर जिंदगी और मौत के बीच झूलती रहीं।

पिता से कहा- ‘हर हाल में दूंगी परीक्षा’, शिक्षा मंत्री ने बढ़ाया हाथ

अस्पताल के बेड पर जब सृष्टि के स्वास्थ्य में थोड़ा सुधार हुआ, तो उन्होंने अपने पिता शीशराम दुबे से कहा कि वह अपने सालभर की मेहनत को बेकार नहीं जाने देंगी और हर हाल में नीट परीक्षा देंगी। बेटी के इस फौलादी संकल्प को देखकर पिता ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पत्र लिखकर मदद की गुहार लगाई। पिता ने अनुरोध किया कि सृष्टि को मेडिकल उपकरणों, आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाओं और परीक्षा केंद्र के ग्राउंड फ्लोर पर परीक्षा देने की विशेष अनुमति दी जाए।

शिक्षा मंत्री के हस्तक्षेप पर NTA ने किए विशेष इंतजाम

छात्रा की इस मार्मिक और प्रेरणादायक स्थिति को देखते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने तुरंत मामले का संज्ञान लिया। उनके निर्देश पर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) और कोलकाता के स्थानीय प्रशासन ने हरकत में आते हुए परीक्षा केंद्र पर सृष्टि के लिए विशेष व्यवस्थाएं कीं।

परीक्षा केंद्र पर की गई खास व्यवस्थाएं:

  • ग्राउंड फ्लोर पर सृष्टि के लिए एक अलग कमरे (Special Room) का इंतजाम किया गया।
  • परीक्षा के दौरान आवश्यक मेडिकल उपकरण और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं।
  • किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए परीक्षा केंद्र के ठीक बाहर एक मेडिकल टीम और अत्याधुनिक एम्बुलेंस तैनात रही।

लाखों छात्र-छात्राओं के लिए प्रेरणा बनीं सृष्टि, परिवार ने जताया आभार

तमाम मेडिकल बंदोबस्त और डॉक्टरों की निगरानी के बीच सृष्टि दुबे आखिरकार NEET UG 2026 की परीक्षा में शामिल हुईं। परीक्षा हॉल से बाहर आने के बाद सृष्टि के माता-पिता भावुक हो गए। उन्होंने बेटी के डॉक्टर बनने के सपने को टूटने से बचाने और इस संकट की घड़ी में त्वरित सहायता देने के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, NTA और स्थानीय प्रशासन का दिल से आभार व्यक्त किया।

सृष्टि की यह अटूट इच्छाशक्ति और संघर्ष की कहानी आज देशभर के लाखों विद्यार्थियों के लिए एक मिसाल बन चुकी है।

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