महाराष्ट्र के 29 नगर निगमों के हालिया निकाय चुनावों (जनवरी 2026) में असदुद्दीन ओवैसी की अगुवाई वाली ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने शानदार प्रदर्शन किया। पार्टी ने कुल 114-126 सीटें जीतीं (विभिन्न रिपोर्ट्स में थोड़ा अंतर), जो राज्य में उसकी अब तक की सबसे मजबूत उपस्थिति है। छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) में AIMIM ने 33 सीटें जीतकर मुख्य विपक्षी दल बनी, जबकि मालेगांव में 21 सीटें, अमरावती में 15, नांदेड़ में 13-15, धुले में 10, सोलापुर में 8, मुंबई (BMC) में 6-8, ठाणे में 5 और अन्य जगहों पर भी अच्छा स्कोर किया।
यह जीत AIMIM के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पार्टी ने मुस्लिम-बहुल वार्डों में कांग्रेस, NCP (शरद पवार), समाजवादी पार्टी और यहां तक कि कुछ शिवसेना गुटों के वोट बैंक में सेंध लगाई। ओवैसी की डोर-टू-डोर कैंपेन, स्थानीय मुद्दों (जैसे बुनियादी ढांचा, पानी, सफाई) पर फोकस और पिछले चुनावों में करीबी हार से मिली प्रेरणा ने कार्यकर्ताओं को जोश दिया। पार्टी ने BMC में पहली बार मजबूत फुटप्रिंट बनाया, जहां पहले सिर्फ 2 सीटें थीं।
इस जीत के मायने गहरे हैं:
- मुस्लिम वोट का बंटवारा: AIMIM ने मुस्लिम बहुल इलाकों में कांग्रेस और MVA गठबंधन को बड़ा झटका दिया, जिससे विपक्षी एकता कमजोर हुई।
- शहरी राजनीति में नई ताकत: महाराष्ट्र की शहरी राजनीति अब ज्यादा प्रतिस्पर्धी हो गई। AIMIM किंगमेकर बन सकती है, खासकर जहां कोई गठबंधन बहुमत नहीं पा रहा।
- भविष्य की चुनौती: 2029 विधानसभा चुनावों से पहले AIMIM की पकड़ मजबूत हुई, जो BJP-महायुति के लिए भी विचारणीय है। हालांकि BJP ने कुल मिलाकर 25+ निगमों में बहुमत हासिल किया।
- सामाजिक संदेश: ओवैसी ने कहा, “यह विकास और न्याय की जीत है।” पार्टी ने कहा कि लोग AIMIM के प्रयासों को स्वीकार कर रहे हैं।
यह परिणाम महाराष्ट्र की राजनीति में AIMIM को अनदेखा न कर पाने वाली ताकत बनाता है, जबकि कांग्रेस-NCP को मुस्लिम वोटरों को वापस लाने की चुनौती देता है।























