महाराष्ट्र के बारामती में हुए चर्चित प्लेन हादसे के बाद सियासी हलचल थमने का नाम नहीं ले रही है। इस हादसे में अजित पवार की मौत के बाद अब जांच प्रक्रिया पर नए सवाल खड़े हो गए हैं। शरद पवार गुट वाली Nationalist Congress Party (एनसीपी) के नेता Rohit Pawar ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जांच की पारदर्शिता पर गंभीर आपत्तियां जताई हैं। रोहित पवार ने फुल फ्यूल टैंक, ब्लैक बॉक्स की स्थिति और अतिरिक्त ईंधन जैसे कई अहम मुद्दों पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष और गहन जांच की मांग की है।
रोहित पवार ने कहा कि जिस विमान को सीमित दूरी तय करनी थी, उसमें फ्यूल टैंक फुल क्यों कराया गया? उन्होंने सवाल किया कि क्या यह सामान्य प्रक्रिया थी या इसके पीछे कोई विशेष कारण था। उनका कहना है कि यदि उड़ान छोटी दूरी की थी, तो पूरी टंकी भरवाने का औचित्य स्पष्ट किया जाना चाहिए। इस बिंदु पर अब तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है, जिससे संदेह और गहरा गया है।
हादसे की जांच में सबसे अहम भूमिका निभाने वाला ब्लैक बॉक्स भी विवादों में आ गया है। रोहित पवार ने आरोप लगाया कि ब्लैक बॉक्स को लेकर पहले ही दिल्ली स्तर पर शंकाएं जताई गई थीं। उन्होंने कहा कि ब्लैक बॉक्स राजनीति से अछूता नहीं रहना चाहिए और उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यदि ब्लैक बॉक्स की सुरक्षा और डेटा की पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं की गई, तो जांच की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लग सकता है।
रोहित पवार ने दावा किया कि उन्होंने पहले ही यह प्रमाण दिया था कि वह VSR कंपनी के विमान से यात्रा कर चुके हैं, जो बाद में सही साबित हुआ। उन्होंने कहा कि हादसे के बाद विमान के फ्यूल टैंक की स्थिति और विस्फोट की तीव्रता को लेकर जो बातें सामने आई हैं, वे कई नई शंकाओं को जन्म देती हैं। उनका आरोप है कि कुछ तथ्यों को अब तक सार्वजनिक नहीं किया गया है।
रोहित पवार ने यह भी कहा कि पहले यह आशंका जताई गई थी कि विमान के पिछले हिस्से में अवैध रूप से अतिरिक्त ईंधन के कैन रखे गए थे। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि विमान में सामान्य से अधिक ईंधन मौजूद था या अतिरिक्त कैन रखे गए थे, तो इसकी अनुमति किसने दी? क्या यह सुरक्षा मानकों का उल्लंघन था? उनके अनुसार, अतिरिक्त ईंधन के कारण विस्फोट अधिक तीव्र हो सकता है। इस पहलू की तकनीकी जांच बेहद जरूरी है।
प्रेस वार्ता में रोहित पवार ने कहा कि 27 जनवरी को एक नेता के मुलाकात के लिए आने और किसी फाइल पर हस्ताक्षर होने जैसी बातों पर पहले संदेह जताया गया था, लेकिन बाद में ये बातें सही साबित होती दिखीं। उन्होंने आरोप लगाया कि कई अहम बिंदुओं पर अब तक स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया है, जिससे पूरे मामले की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
हादसे के बाद अब राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। एनसीपी (शरद गुट) की ओर से मामले की स्वतंत्र और गहन जांच की मांग की जा रही है। फिलहाल जांच एजेंसियों की ओर से आधिकारिक रिपोर्ट का इंतजार है, लेकिन रोहित पवार के ताजा आरोपों ने बारामती प्लेन हादसे को एक बार फिर सियासी बहस के केंद्र में ला दिया है।
आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि जांच एजेंसियां इन सवालों पर क्या जवाब देती हैं और क्या इस हादसे की सच्चाई पूरी पारदर्शिता के साथ सामने आ पाती है।
























