केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने 2026 की कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं की डेटशीट जारी कर दी है। इस बार खास बात यह है कि डेटशीट परीक्षा शुरू होने से पूर्ण 110 दिन पहले जारी की गई है। परीक्षाएं 17 फरवरी 2026 से शुरू होंगी और कक्षा 10वीं की 10 मार्च तक तथा कक्षा 12वीं की 9 अप्रैल तक चलेंगी। CBSE का यह कदम छात्रों को लंबे समय तक तैयारी का मौका देने और परीक्षा के तनाव को कम करने के लिए उठाया गया है। लेकिन सवाल यह है कि बोर्ड परीक्षा का तनाव सिर्फ छात्रों तक सीमित नहीं रहता – अभिभावक और शिक्षक भी इससे उतने ही प्रभावित होते हैं। ऐसे में क्या किया जाए?बोर्ड परीक्षाएं भारतीय शिक्षा प्रणाली में एक महत्वपूर्ण पड़ाव हैं।

लाखों छात्रों के लिए यह भविष्य का द्वार खोलती हैं, लेकिन साथ ही अपार दबाव भी लाती हैं। छात्रों में पढ़ाई का बोझ, परफॉर्मेंस की चिंता और रिजल्ट का डर आम है। कई सर्वे बताते हैं कि बोर्ड परीक्षा के समय छात्रों में चिंता, अनिद्रा और डिप्रेशन के मामले बढ़ जाते हैं। लेकिन यह तनाव सिर्फ छात्रों का नहीं होता। अभिभावक अपने बच्चे की सफलता को अपनी जिम्मेदारी मानते हैं, जिससे उनकी चिंता बढ़ जाती है। वे रात-दिन बच्चे की पढ़ाई पर नजर रखते हैं, तुलना करते हैं और अपेक्षाएं ऊंची रखते हैं। शिक्षकों पर भी दबाव होता है – स्कूल की रैंकिंग, छात्रों के रिजल्ट और प्रिंसिपल की उम्मीदें उन्हें तनावग्रस्त बना देती हैं। नतीजा यह कि पूरा परिवार और स्कूल का माहौल तनावपूर्ण हो जाता है।
CBSE इस समस्या को समझता है और इसलिए इस बार डेटशीट इतनी जल्दी जारी की गई। बोर्ड का मानना है कि छात्रों को स्पष्ट टाइमलाइन मिलने से वे बेहतर प्लानिंग कर सकेंगे – रिवीजन, मॉक टेस्ट और कमजोर सब्जेक्ट्स पर फोकस। इससे अनिश्चितता कम होगी और तनाव भी। साथ ही, NEP 2020 के तहत कक्षा 10वीं में दो बार परीक्षा का विकल्प भी तनाव कम करने की दिशा में एक कदम है। लेकिन सिर्फ डेटशीट जारी करना काफी नहीं। तनाव प्रबंधन के लिए सक्रिय कदम उठाने जरूरी हैं।सबसे पहले छात्रों के लिए: नियमित टाइमटेबल बनाएं। रोज 6-8 घंटे पढ़ाई करें, लेकिन ब्रेक लें। लगातार पढ़ने से बचें – हर घंटे 5-10 मिनट का ब्रेक लें। व्यायाम, योग या मेडिटेशन करें। गहरी सांस की एक्सरसाइज तनाव कम करती है। स्वस्थ भोजन और 7-8 घंटे की नींद जरूरी है। दोस्तों या परिवार से बात करें, अपनी चिंताएं शेयर करें। पिछले पेपर्स सॉल्व करें और मॉक टेस्ट दें – इससे कॉन्फिडेंस बढ़ेगा।
अभिभावकों के लिए: बच्चे पर अनावश्यक दबाव न डालें। उनकी तुलना दूसरों से न करें। प्रोत्साहन दें, न कि डांटें। बच्चे की मेहनत की तारीफ करें, रिजल्ट पर फोकस न करें। घर का माहौल सकारात्मक रखें – ह्यूमर और हल्की बातें शामिल करें। अगर बच्चा तनाव में दिखे, तो काउंसलर से बात करें। याद रखें, परीक्षा जीवन का अंत नहीं है।शिक्षकों के लिए: छात्रों को गाइड करें, लेकिन डराएं नहीं। क्लास में डिस्कशन और ग्रुप स्टडी को बढ़ावा दें। कमजोर छात्रों को अतिरिक्त मदद दें। खुद भी तनाव प्रबंधन करें – क्योंकि आपका मूड छात्रों पर असर डालता है।अंत में, बोर्ड परीक्षा महत्वपूर्ण है, लेकिन जीवन की एकमात्र चीज नहीं। CBSE का यह नया प्रयास सराहनीय है, लेकिन तनाव मुक्त माहौल बनाने के लिए सभी – छात्र, पैरेंट्स और टीचर्स – को मिलकर काम करना होगा। सकारात्मक सोच, प्लानिंग और सपोर्ट से इस चुनौती को आसानी से पार किया जा सकता है। सफलता न सिर्फ मार्क्स में, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य में भी है।








































