राज्य

‘सुशासन बाबू’ से ‘पलटू बाबू’ तक, बिहार की राजनीति के 20 साल

बिहार की राजनीति के क्षितिज पर पिछले दो दशकों से एक ही नाम छाया रहा— नीतीश कुमार। साल 2005 के 24 नवंबर को जब उन्होंने पहली बार पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता संभाली थी, तब किसी ने नहीं सोचा था कि यह ‘इंजीनियर’ बिहार के इतिहास की सबसे लंबी राजनीतिक पारी खेलने जा रहा है। […]

दीदी का ‘धरना’ दांव: लोकतंत्र की दुहाई या चुनावी शह-मात?

पश्चिम बंगाल की राजनीति में ‘दीदी’ के नाम से मशहूर ममता बनर्जी ने एक बार फिर अपनी राजनीतिक बिसात से सबको चौंका दिया है। सिंगूर आंदोलन से लेकर व्हीलचेयर पर चुनाव प्रचार तक, ममता ने हमेशा साबित किया है कि उन्हें ‘स्ट्रीट फाइटर’ क्यों कहा जाता है। लेकिन इस बार लड़ाई सड़क से बढ़कर सीधे

बड़ी खबर: लद्दाख के उपराज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने दिया इस्तीफा

केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के राजनीतिक गलियारे से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। लद्दाख के उपराज्यपाल (LG) कविंद्र गुप्ता ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। महज 9 महीने के कार्यकाल के बाद अचानक आए इस फैसले ने सभी को चौंका दिया है। उनके इस अचानक त्यागपत्र से प्रदेश

बस अब घर जाना चाहता हूँ…” मिडिल-ईस्ट की जंग के बीच फंसे डैरेन सैमी

खेल के मैदान पर चौके-छक्के बरसाने वाले खिलाड़ी आज एक अनचाही बेबसी के बीच फंसे हैं। मिडिल-ईस्ट में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच गहराते युद्ध के संकट ने क्रिकेट की दुनिया की रफ्तार पर भी ब्रेक लगा दिया है। हालात इतने नाजुक हैं कि टी-20 वर्ल्ड कप से बाहर होने के बाद भी वेस्टइंडीज

बंगाल चुनाव से पहले राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस का इस्तीफा

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों की आहट के बीच एक बड़ी खबर सामने आ रही है। राज्य के राज्यपाल डॉ. सी.वी. आनंद बोस ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। चुनाव से ठीक पहले हुए इस घटनाक्रम ने राज्य के सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है। विधानसभा चुनाव से ऐन पहले राज्यपाल

कैसे ‘छोटे भाई’ से ‘किंगमेकर’ और फिर ‘किंग’ बन गई भाजपा?

भारतीय राजनीति के बिसात पर पिछले एक दशक में अगर कुछ सबसे तेजी से बदला है, तो वह है भाजपा का अपने सहयोगियों के साथ समीकरण। कभी क्षेत्रीय क्षेत्रिय पार्टियों के पीछे चलने वाली भारतीय जनता पार्टी अब ‘ड्राइविंग सीट’ पर है। राज्यसभा चुनाव के लिए विनोद तावड़े, रामदास आठवले, रामराव वडकुते और माया इवनाते

मिशन दिल्ली: क्या नीतीश बनेंगे देश के नए ‘चाणक्य’?

बिहार के अजेय मुख्यमंत्री, ‘साहब’ अचानक राज्यसभा जाने का फैसला करते हैं, जिससे एक भीषण सत्ता संघर्ष शुरू हो जाता है। एक तरफ बीजेपी अपना मुख्यमंत्री चाहती है, दूसरी तरफ ‘साहब’ अपने निशांत बेटे को राजनीति में उतारकर अपनी विरासत बचाना चाहते हैं, और तीसरी तरफ विपक्ष इस टूट का फायदा उठाने के लिए तैयार

महापरिवर्तन: क्या नीतीश का ‘राज्याभिषेक’ दिल्ली में होगा?

बिहार की सियासत में इन दिनों वह खामोशी है, जो किसी बड़े तूफान के आने से पहले महसूस होती है। करीब ढाई दशकों तक बिहार की सत्ता के धुरी बने रहे नीतीश कुमार अब ‘किंग’ की भूमिका छोड़कर ‘किंगमेकर’ या मार्गदर्शक की भूमिका में नजर आ सकते हैं।पटना के गलियारों से छनकर आ रही खबरों

होली पर ‘गले’ मिलेगी बोतल: दिल्ली में ‘ड्राई डे’ का खेल खत्म

होली पर रंगों की खुमारी के साथ-साथ अब दिल्लीवालों के लिए ‘रूहानी’ खुशी का इंतजाम भी हो गया है। अगर आप इस चिंता में थे कि त्योहार के दिन ठेके बंद रहेंगे और स्टॉक पहले से जमा करना पड़ेगा, तो अब चैन की सांस लीजिए। दिल्ली सरकार ने शराब के शौकीनों को बड़ा तोहफा देते

बिहार राज्यसभा चुनाव: क्या है जीत का जादुई नंबर?

बिहार में राज्यसभा की खाली हो रही सीटों के लिए सियासी बिसात बिछ चुकी है। एनडीए ने अपने उम्मीदवारों के नाम लगभग साफ कर दिए हैं। भाजपा से नितिन नवीन, शिवेश राम, जेडीयू से रामनाथ ठाकुर और आरएलएम से उपेंद्र कुशवाहा रेस में हैं। लेकिन सवाल यह है कि विधानसभा के आंकड़ों के हिसाब से

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