पश्चिम बंगाल की सियासत में सोमवार को वो हो गया जिसकी कल्पना शायद खुद ममता बनर्जी ने भी नहीं की होगी। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के इतिहास में पहली बार ‘दीदी’ को उन्हीं की बनाई पार्टी के सर्वोच्च पद से बेदखल कर दिया गया है। ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट ने एक बेहद नाटकीय घटनाक्रम में ममता बनर्जी को पार्टी चेयरपर्सन के पद से हटा दिया है, वहीं पार्टी के ‘पावर सेंटर’ माने जाने वाले अभिषेक बनर्जी को टीएमसी से सस्पेंड कर दिया गया है।
इस बगावत को मामूली समझने की भूल कतई नहीं की जा सकती, क्योंकि इस नए गुट के पास 60 बागी विधायकों और कम से कम 70 पार्षदों का खुला समर्थन है। बागी गुट ने टीएमसी पर औपचारिक रूप से कब्जे का ऐलान कर दिया है, जिसके बाद अब सबसे बड़ा सस्पेंस यह खड़ा हो गया है कि: क्या असली ‘तृणमूल कांग्रेस’ और उसका चुनाव चिन्ह अब बागियों के हाथ में चला जाएगा? क्या बागी गुट चुनाव आयोग में सिंबल के लिए दावा ठोकने जा रहा है?
Inside Story: नकली दस्तखत के विवाद से शुरू हुआ खेल, ऐसे पलट गई बाजी!
इस पूरे सियासी ड्रामे की पटकथा विधानसभा से शुरू हुई थी। राज्य में भाजपा के सत्ता में आने के बाद, शोभनदेव चटर्जी का नाम विपक्ष के नेता (LoP) के तौर पर 70 विधायकों के हस्ताक्षर के साथ विधानसभा भेजा गया था। लेकिन यहीं से खेल पलट गया। एंटाली के विधायक संदीपन साहा और उलुबेरिया पूर्व के विधायक ऋतब्रत बनर्जी ने शिकायत दर्ज कराई कि उनके दस्तखत नकली हैं।
दोनों विधायक स्पीकर के पास पहुंचे। इसके बाद धीरे-धीरे दीदी से नाराज विधायकों का कारवां ऋतब्रत बनर्जी के साथ जुड़ता चला गया। ऋतब्रत 58 विधायकों को लेकर सीधे स्पीकर के सामने परेड कर गए, जिसके बाद स्पीकर ने उन्हें नेता प्रतिपक्ष का दर्जा दे दिया। हालांकि, इस फैसले को अदालत में चुनौती दी गई, लेकिन वहां भी बाजी ऋतब्रत के हाथ लगी और कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया।
न्यूटाउन की वो ‘गुप्त बैठक’ और बदल गया बंगाल का भूगोल
इस तख्तापलट के औपचारिक ऐलान से पहले सोमवार को न्यूटाउन में ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई में बागी पार्षदों की एक बेहद अहम बैठक हुई। इस बैठक में करीब 70 पार्षद मौजूद थे। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के मुताबिक, दिसंबर तक कोलकाता नगर निगम के चुनाव होने हैं, लेकिन इन चुनावों से ठीक पहले पार्षदों और विधायकों का यह विद्रोह ममता बनर्जी के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है।
ममता-अभिषेक ‘आउट’, जानें नई कमेटी में किसे मिली जगह?
बागी गुट ने लेजिस्लेटिव और ऑर्गेनाइजेशनल सपोर्ट का दावा करते हुए एक बिल्कुल नए लीडरशिप स्ट्रक्चर (संगठन) का गठन कर दिया है। नई कमेटी की लिस्ट इस प्रकार है:
| पद | नाम |
| नया चेयरमैन | अरूप रॉय |
| जनरल सेक्रेटरी (महासचिव) | जावेद खान, संदीपन साहा, रीताब्रत बनर्जी, सबीना यास्मीन |
| उपाध्यक्ष | अरूप बिस्वास, फिरहाद हकीम, रथिन घोष |
| कोषाध्यक्ष | अख्तरुज्जमां |
ममता बनर्जी को किनारे कर चुके इस नए संगठन के सामने अब अपनी वैधता साबित करने की चुनौती है। देखना दिलचस्प होगा कि ‘हवाई चप्पल’ के दम पर दिल्ली तक को चुनौती देने वाली ममता बनर्जी इस ‘अंदरूनी बगावत’ का जवाब किस अंदाज में देती हैं! बंगाल की राजनीति में सस्पेंस अब अपने चरम पर है।