पश्चिम एशिया में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक स्तर पर चिंता पैदा कर दी है, लेकिन भारत में इस युद्ध की आड़ में एक अलग ही तरह का डर फैलाया जा रहा है। पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर ‘भारत में लॉकडाउन’ की खबरें तेजी से वायरल हो रही हैं। इन दावों ने आम जनता के बीच भारी भ्रम पैदा कर दिया है, जिसके बाद अब केंद्र सरकार को खुद सामने आकर सफाई देनी पड़ी है। मोदी सरकार के दो वरिष्ठ मंत्रियों ने इन अटकलों को पूरी तरह निराधार और भ्रामक बताया है।
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने स्पष्ट किया कि सरकार वैश्विक स्थिति, खासकर ऊर्जा और सप्लाई चेन पर करीब से नजर रख रही है। उन्होंने कहा, “भारत में लॉकडाउन की खबरें पूरी तरह झूठी हैं। सरकार के पास ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। हम ईंधन और जरूरी वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित कर रहे हैं।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने संसद परिसर में मीडिया से बात करते हुए कहा कि जनता को पैनिक करने की जरूरत नहीं है। उन्होंने एक्साइज ड्यूटी में कटौती का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार जनता पर से आर्थिक बोझ कम करने के लिए कदम उठा रही है, न कि पाबंदियां लगाने के लिए।
सोशल मीडिया पर लॉकडाउन ट्रेंड होने के पीछे मुख्य रूप से तीन कारण बताए जा रहे हैं। लोगों को लगा कि ईरान युद्ध के कारण तेल की सप्लाई रुकेगी और सरकार आवाजाही रोकने के लिए लॉकडाउन लगाएगी। शुक्रवार को प्रधानमंत्री मोदी की राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ प्रस्तावित वर्चुअल बैठक को लोगों ने गलती से ‘कोरोना काल’ जैसी आपातकालीन बैठक समझ लिया।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक सार्वजनिक मंच से आशंका जताई थी कि केंद्र सरकार फिर से लॉकडाउन लगा सकती है और लोगों को घरों में बंद होना पड़ सकता है। उनके इस बयान ने आग में घी डालने का काम किया।
सरकार ने साफ कर दिया है कि ईरान युद्ध का असर वैश्विक बाजार पर जरूर है, लेकिन भारत की आंतरिक स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। किसी भी असत्यापित सोशल मीडिया पोस्ट पर भरोसा न करें। वर्तमान में देश में लॉकडाउन जैसी कोई स्थिति नहीं है और सभी जरूरी सेवाएं सुचारू रूप से जारी रहेंगी।















