POCSO एक्ट (Protection of Children from Sexual Offences Act, 2012) भारत में बच्चों को यौन शोषण से बचाने के लिए बनाया गया एक सख्त कानून है। इस कानून के तहत 18 वर्ष से कम उम्र के किसी भी व्यक्ति को ‘बालिग’ माना जाता है और सहमति से भी यौन संबंध बनाने पर अपराध माना जाता है। लेकिन हाल के वर्षों में इस कानून के दुरुपयोग की कई घटनाएं सामने आई हैं, खासकर किशोरों के आपसी प्रेम संबंधों में। ऐसे मामलों में लड़की के परिवार द्वारा विरोध जताने पर POCSO के तहत लड़के पर मुकदमा दर्ज करा दिया जाता है, भले ही संबंध पूरी तरह सहमति से हो और दोनों की उम्र में ज्यादा फर्क न हो।
रोमियो-जूलियट क्लॉज (Romeo-Juliet Clause) एक ऐसा कानूनी प्रावधान है, जो सहमति वाले किशोर संबंधों को अपराध से मुक्त करता है। यह अमेरिका और कई अन्य देशों में लागू है, जहां ‘क्लोज-इन-एज एक्सेप्शन’ (Close-in-Age Exception) के तहत अगर दोनों पक्ष किशोर हों, उम्र में 2-4 साल का ही अंतर हो (जैसे 16 और 18 साल), कोई जबरदस्ती या शोषण न हो, तो संबंध को अपराध नहीं माना जाता। इसका नाम शेक्सपियर के नाटक ‘रोमियो एंड जूलियट’ से आया है, जो दो युवा प्रेमियों की दुखद प्रेम कहानी है।
9 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिस्वर सिंह की बेंच ने उत्तर प्रदेश के एक मामले (State of Uttar Pradesh v. Anurudh) में यह महत्वपूर्ण टिप्पणी की। कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के कुछ निर्देशों को रद्द करते हुए POCSO के दुरुपयोग पर गंभीर चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि POCSO बच्चों की सुरक्षा के लिए है, लेकिन कई बार परिवार इसे “स्कोर सेटल” करने या प्रेम संबंध तोड़ने के लिए इस्तेमाल करते हैं। इससे असली शोषण के शिकार बच्चे डर, गरीबी या कलंक के कारण चुप रह जाते हैं, जबकि विशेषाधिकार वाले लोग कानून का दुरुपयोग करते हैं।
कोर्ट ने एनफोल्ड प्रोएक्टिव हेल्थ ट्रस्ट और यूनिसेफ की रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें महाराष्ट्र, असम और पश्चिम बंगाल में 2016-2020 के POCSO केसों में से करीब 24-25% “रोमांटिक” प्रकृति के थे, जहां संबंध सहमति से थे और 80% से ज्यादा शिकायतें लड़की के माता-पिता ने की थीं। कोर्ट ने इसे “ग्रिम सोसाइटी चिज्म” (grim societal chasm) कहा और केंद्र सरकार के कानून सचिव को सुझाव दिया कि POCSO में रोमियो-जूलियट क्लॉज जोड़ने पर विचार करें, ताकि सच्चे किशोर संबंध कानून के शिकंजे से बचें। साथ ही, कानून का दुरुपयोग करने वालों पर मुकदमा चलाने का तंत्र बनाया जाए।
यह सुझाव POCSO को कमजोर नहीं करता, बल्कि इसे और संतुलित बनाता है – असली शोषण पर सख्ती बनी रहे, लेकिन सामान्य किशोर विकास और प्रेम को अपराध न बनाया जाए। अब केंद्र सरकार पर है कि वह इस पर अमल करे या नहीं।
























