भारतीय शेयर बाजार में आज ‘ब्लैक फ्राइडे’ जैसा माहौल देखने को मिल रहा है। लगातार तीसरे दिन बाजार में गिरावट का दौर जारी है, जिससे निवेशकों में बेचैनी बढ़ गई है। दोपहर 12:30 बजे तक BSE सेंसेक्स 1,028.68 अंक की भारी गिरावट के साथ 75,005.74 के स्तर पर आ गया। वहीं, NSE निफ्टी 361.05 अंक टूटकर 23,278.10 पर कारोबार कर रहा है।
बाजार में मचे इस कोहराम के पीछे मुख्य रूप से चार बड़े कारण माने जा रहे हैं। पहला मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर है। ईरान द्वारा दो ऑयल टैंकरों पर हमले की खबरों के बाद ब्रेंट क्रूड $100 प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है। होर्मुज स्ट्रेट में सप्लाई बाधित होने की आशंका ने भारतीय बाजार की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है।
ईरान-इजरायल विवाद का साया पूरी दुनिया के बाजारों पर है। एशियाई बाजारों (निक्केई, हैंग सेंग, SSE) से लेकर अमेरिकी बाजारों तक, हर तरफ लाल निशान (बिकवाली) हावी है। इन वैश्विक संकेतों ने घरेलू निवेशकों का सेंटिमेंट खराब कर दिया है।
विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय बाजार से अपना पैसा लगातार निकाल रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक गुरुवार की बिकवाली ₹ 7,049.87 करोड़ रही। वहीं मार्च में अब तक की कुल निकासी 39,000 करोड़ ही रही। इस बड़े पैमाने पर हो रही ‘प्रॉफिट बुकिंग’ ने बाजार की कमर तोड़ दी है।
डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 92.37 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर फिसल गया है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और डॉलर की मजबूती ने रुपये पर भारी दबाव बनाया है। कमजोर रुपये का सीधा मतलब है महंगा आयात और बढ़ती महंगाई, जिसका सीधा असर इकोनॉमी पर पड़ता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक जियोपॉलिटिकल (भू-राजनीतिक) तनाव कम नहीं होता और कच्चे तेल की कीमतें स्थिर नहीं होतीं, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
डिस्क्लेमर: यहाँ मुहैया जानकारी सिर्फ़ सूचना हेतु दी जा रही है। मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेश से पहले हमेशा एक्सपर्ट की सलाह लें।
















