मध्य प्रदेश में मतदाता सूची को सही करने के लिए निर्वाचन आयोग द्वारा शुरू की गई ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) प्रक्रिया ने ऐसे परिणाम दिए, जो वर्षों की तलाश और पुलिस रिकॉर्ड भी सामने नहीं ला सके। इस एक प्रशासनिक पहल ने जहां 22 साल पहले लापता हुए बेटे को उसकी वृद्ध मां से फिर मिला दिया, वहीं सौ से अधिक संगीन अपराधों में वांछित एक शातिर अंतरराज्यीय अपराधी को भी कानून के शिकंजे तक पहुंचा दिया। यह कहानी केवल सरकारी दस्तावेजों की शुद्धता तक सीमित नहीं है, बल्कि उस अनपेक्षित संयोग की है, जिसने अनजाने में कई जिंदगियों की दिशा बदल दी।
22 साल की प्रतीक्षा और वोटर आईडी की जरूरत
मंदसौर जिले के खिलचीपुरा गांव की यह घटना किसी सिनेमा की कहानी जैसी प्रतीत होती है। वर्ष 2003 में विनोद गायरी नामक युवक प्रेम विवाह के बाद पारिवारिक असहमति के चलते घर छोड़कर चला गया था और फिर कभी लौटकर नहीं आया। वर्षों तक तलाश के बाद 2012 तक परिवार ने उम्मीद छोड़ दी और उसे मृत मान लिया। इसी दौरान पिता का भी निधन हो गया।
लेकिन वर्ष 2026 में परिस्थितियां बदलीं, जब राजस्थान के नागौर में एक स्कूल में चपरासी के रूप में कार्यरत विनोद ने SIR प्रक्रिया के तहत अपना वोटर आईडी अपडेट कराने का प्रयास किया। पुराने रिकॉर्ड के सत्यापन के दौरान पंचायत द्वारा उसकी मां से संपर्क किया गया, जिससे वर्षों बाद उसकी बूढ़ी आंखों में फिर से उम्मीद की चमक लौट आई।
पुलिस की सक्रियता और मां-बेटे का मिलन
मां से मिली जानकारी के आधार पर मंदसौर पुलिस ने जांच शुरू की और कड़ियां जोड़ते हुए नागौर पहुंची, जहां विनोद अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ सुरक्षित पाए गए। 22 वर्षों बाद जब वह अपने गांव लौटे, तो माहौल बेहद भावुक हो उठा। लंबे समय से वीरान पड़ा घर फिर से खुशियों से भर गया।
मंदसौर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक टी.एस. बघेल के मुताबिक, SIR प्रक्रिया के तहत EPIC विवरण की अनिवार्यता ने ही इस पूरे मामले से पर्दा उठाया। अब विनोद अपनी वृद्ध मां और बीमार भाई को भी अपने साथ राजस्थान ले जाने की तैयारी में हैं।
इंदौर में ‘तलवार सिंह’ की गिरफ्तारी
जहां एक तरफ SIR ने एक परिवार को मिलाया, वहीं इंदौर में यही प्रक्रिया एक कुख्यात अपराधी के लिए मुसीबत बन गई। 54 वर्षीय अब्दुल रशीद उर्फ ‘तलवार सिंह’, जिस पर मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में हत्या, डकैती और चोरी के 100 से अधिक मामले दर्ज हैं, SIR प्रक्रिया के तहत फॉर्म भरने इंदौर पहुंचा था।
कानूनी दस्तावेजों में खुद को दर्ज कराने की उसकी जल्दबाजी ही उसकी पहचान उजागर कर गई। इसी दौरान उसने इंदौर के गीता नगर इलाके में चोरी की वारदात को अंजाम दिया, लेकिन SIR से जुड़ी गतिविधियों के कारण पुलिस उस तक पहुंचने में सफल रही। अंततः पुलिस ने उसे 7.5 लाख रुपये के चोरी के माल के साथ गिरफ्तार कर लिया।
आंकड़ों से आगे की कहानी
निर्वाचन आयोग की इस विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया के आंकड़े भी हैरान करने वाले हैं। अब तक राज्य में 42.74 लाख नाम मतदाता सूची से हटाए जा चुके हैं, जिससे कुल मतदाताओं की संख्या 5.74 करोड़ से घटकर 5.31 करोड़ रह गई है। यानी हर तेरहवां नाम सूची से बाहर हुआ है। हालांकि इन आंकड़ों के पीछे विनोद जैसी घर वापसी और तलवार सिंह जैसी गिरफ्तारियों की कहानियां भी छिपी हैं। इंदौर के डीसीपी राजेश व्यास का कहना है कि यदि यह अपराधी SIR प्रक्रिया के बहाने इंदौर नहीं आता, तो उसकी गिरफ्तारी बेहद कठिन होती।









