पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 का बिगुल बज चुका है और इस बार लड़ाई सिर्फ रैलियों और जनसभाओं तक सीमित नहीं है। स्मार्टफोन की स्क्रीन पर ‘डिजिटल योद्धा’ आमने-सामने हैं। जहां BJP अपनी केंद्रीय आईटी टीम के भरोसे चुनावी नैरेटिव सेट कर रही है, वहीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की TMC ने ‘लोकल कनेक्ट’ और ‘बंगाली अस्मिता’ को हथियार बनाकर एक अभेद्य डिजिटल किला तैयार किया है।
TMC ने इस बार तकनीक और भावना का ऐसा मेल तैयार किया है जो सीधे मतदाता के इनबॉक्स तक पहुँच रहा है। पार्टी ने पूरे राज्य में 1.5 लाख से अधिक वॉट्सऐप ग्रुप्स का नेटवर्क बनाया है, जिससे 1 करोड़ से ज्यादा लोग सीधे जुड़े हैं। इन ग्रुप्स के जरिए पार्टी की नीतियां और विपक्ष पर पलटवार बिजली की गति से फैलाया जा रहा है।
पार्टी का सबसे मजबूत स्तंभ ‘दीदिर दूत’ ऐप बना हुआ है। अब तक 18 लाख से ज्यादायह ऐप डाउनलोड हो चुका है। जिसमें एक्टिव यूज़र्स करीब 1.3 लाख (डेली) और 7.3 लाख (मंथली) हैं। इसकी खासियत यह है कि इसमें कार्यकर्ताओं को न केवल रीयल-टाइम अपडेट मिलते हैं, बल्कि उन्हें टास्क दिए जाते हैं और क्विज़ के जरिए जोड़ा जाता है।
TMC की आईटी सेल के प्रमुख देबांग्शु भट्टाचार्य (जो ‘खेला होबे’ फेम हैं) के नेतृत्व में पार्टी रोजाना 10,000 से ज्यादा रील्स और छोटे वीडियो बना रही है। इस डिजिटल इकोसिस्टम की ताकत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि यह नेटवर्क रोजाना 50 करोड़ से ज्यादा इंप्रेशन जेनरेट कर रहा है।
देबांग्शु भट्टाचार्य का कहना है कि हमारी रणनीति साफ है—हम सच बोल रहे हैं, वे (BJP) झूठ। हमारे योद्धा सड़कों से लेकर इंटरनेट तक हर जगह सक्रिय हैं।
पार्टी ने अपनी फौज को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा है:
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ABDJ (आमी बांग्लार डिजिटल जोद्धा): 1.6 लाख से ज्यादा सक्रिय वॉलंटियर्स।
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इन्फ्लुएंसर नेटवर्क: 5,000 से ज्यादा सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स जो पार्टी के ढांचे से बाहर रहकर कंटेंट वायरल करते हैं।
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डिजिटल प्रवक्ता: 50 से ज्यादा विशेषज्ञ जो हर मुद्दे पर तुरंत वीडियो और कमेंट्री जारी करते हैं।
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कमेंट्स आर्मी: सोशल मीडिया पर नैरेटिव को कंट्रोल करने और चर्चा को दिशा देने वाली टीम।
TMC इस चुनाव को राजनीतिक सत्ता से ज्यादा ‘बंगाली गौरव (Identity Politics)’ की लड़ाई बना रही है। पार्टी का आरोप है कि बीजेपी का डिजिटल कैंपेन राज्य के बाहर के लोग चला रहे हैं। ममता बनर्जी की टीम ‘लक्ष्मी भंडार’ जैसी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) योजनाओं के लाभार्थियों के वीडियो दिखाकर यह संदेश दे रही है कि बीजेपी सिर्फ कॉपी कर रही है, जबकि असली जनक टीएमसी है।















