पूर्व केंद्रीय मंत्री और पूर्व सांसद स्मृति ईरानी (Smriti Irani) एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं. इसकी वजह कोई चुनावी बयान या सियासी कार्यक्रम नहीं, बल्कि त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की मतदाता सूची है. पंचायत चुनाव के लिए जारी वोटर लिस्ट में स्मृति ईरानी का नाम ही नहीं है. स्मृति ईरानी का नाम वोटर लिस्ट में नहीं मिलने से क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं. अमेठी के मेदन मवई गांव से जुड़ी स्मृति ईरानी का नाम वोटर लिस्ट में न होने से लोकल लेवल और राजनीतिक गलियारों में सवाल उठ रहे हैं.
जानकारी के मुताबिक, यूपी पंचायत चुनाव के लिए मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया के दौरान स्मृति ईरानी का नाम सूची में नहीं पाया गया. इसके बाद से यह मामला चर्चा का विषय बन गया है. दिलचस्प बात यह है कि अमेठी से सांसद रहने के दौरान स्मृति ईरानी ने मेदन मवई गांव से अपना राजनीतिक और सामाजिक जुड़ाव बनाए रखा था. ऐसे में स्थानीय लोगों को उम्मीद थी कि उनका नाम मतदाता सूची में दिखाई देगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ.
पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी का त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के वोटर लिस्ट से नाम काटने का मामला गरमाता जा रहा है. एसडीएम प्रीति तिवारी ने बताया कि मामले का संज्ञान लिया गया है. इसमें संबंधित खंड विकास अधिकारी को जांच कर आवश्यक संशोधन के निर्देश दिए गए हैं. दावा-आपत्ति के आधार पर पात्र मतदाताओं के नाम शामिल किए जाएंगे. अपात्र और मृतक मतदाताओं के नाम हटाए जाएंगे.
बता दें कि विधानसभा मतदाता सूची में स्मृति ईरानी का नाम शामिल है. भाजपा जिलाध्यक्ष सुधांशु शुक्ला ने बताया कि पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी का नाम विधानसभा मतदाता सूची में दर्ज है. पंचायत मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए आवश्यक अभिलेख बीएलओ को दिए गए थे. इस संबंध में एसडीएम से बात हुई है. उन्होंने आवश्यक सुधार का आश्वासन दिया है.
यह पहला मौका नहीं है, जब स्मृति ईरानी का नाम पंचायत चुनाव की मतदाता सूची में नहीं दिखा हो. साल 2021 के पंचायत चुनाव के दौरान भी उनका नाम वोटर लिस्ट में शामिल नहीं था. ऐसे में इस बार भी नाम न होने की खबर सामने आने के बाद लोगों के बीच चर्चा और तेज हो गई है. लोगों का कहना है कि अमेठी की राजनीति में स्मृति ईरानी का नाम आज भी प्रभाव रखता है. इसलिए मतदाता सूची में उनका नाम न दिखना लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है.
दरअसल, पंचायत चुनाव की मतदाता सूची और विधानसभा या लोकसभा चुनाव की मतदाता सूची में कई बार अंतर होता है. पंचायत चुनाव में मतदाता बनने के लिए संबंधित ग्राम पंचायत क्षेत्र में निर्धारित नियमों के तहत नाम दर्ज होना जरूरी होता है. ऐसे में प्रशासनिक और तकनीकी कारणों से भी किसी व्यक्ति का नाम सूची में नहीं दिखाई दे सकता है. हालांकि अभी तक इस मामले में निर्वाचन विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है कि स्मृति ईरानी का नाम किस वजह सूची में शामिल नहीं है.