पश्चिम बंगाल में चुनावी हार के बाद सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर असंतोष और उथल-पुथल के संकेत दिखाई देने लगे हैं। पार्टी अध्यक्ष ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) की अध्यक्षता में रविवार को होने वाली नवनिर्वाचित विधायकों की बैठक भी रद्द करनी पड़ी, क्योंकि 80 विधायकों में से करीब तीन-चौथाई विधायक बैठक में नहीं पहुंचे। उधर, कई नेताओं ने तृणमूल कांग्रेस से किनारा कर लिया है। 100 से ज्यादा टीएमसी पार्षदों ने इस्तीफा दे दिया है. इस घटनाक्रम ने पार्टी के भीतर चल रही खींचतान और असंतोष की अटकलों को और तेज कर दिया है।
तृणमूल कांग्रेस की रविवार को रद्द हुई बैठक का उद्देश्य चुनावी नतीजों की समीक्षा और आगे की रणनीति तय करना था। ममता बनर्जी ने ये बैठक बुलाई थी, ताकि आगे की रणनीति तय की जा सके। हालांकि, बड़ी संख्या में विधायकों की अनुपस्थिति ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। टीएमसी प्रवक्ता कुणाल घोष ने विधायकों की गैरमौजूदगी को पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी (Abhishek Banerjee) पर हुए कथित हमले और उसके बाद सांसद कल्याण बनर्जी (Kalyan Banerjee) पर हुए हमले से पैदा हुई ‘आपात स्थिति’ का परिणाम बताया जा रहा है। हालांकि, बंगाल की राजनीति पर नजर रखने वाले लोग इसे चुनावी हार के बाद पार्टी के भीतर बढ़ती बेचैनी से भी जोड़कर देख रहे हैं।

तृणमूल कांग्रेस प्रवक्ता कुणाल घोष ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कालीघाट आवास, जहां बैठक होनी थी, वहां पत्रकारों से कहा, “बैठक पहले से निर्धारित थी। हालांकि, हमारे नेताओं पर हुए हमलों के बाद, हमारे विधायक जमीनी स्तर पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, जिसके चलते हमारे कार्यकर्ताओं पर पुलिस ने कड़ी कार्रवाई की है। गैर-मौजूद विधायकों, जो जमीनी स्थिति संभालने और गिरफ्तार किए गए हमारे कार्यकर्ताओं की सहायता करने में व्यस्त हैं।
बंगाल के चुनावी परिणाम आने के बाद हालात बिल्कुल बदल गए हैं, जो सत्ता के गलियारों से लेकर सड़कों तक नजर आ रहे हैं। चुनाव परिणाम आने के बाद से तृणमूल कांग्रेस में इस्तीफों का सिलसिला लगातार जारी है। टीएमसी के प्रवक्ता बिस्वजीत देब ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इसके अलावा शांतनु सेन और अरुप चक्रवर्ती ने भी पार्टी प्रवक्ता के पद से त्यागपत्र दे दिया। वहीं, अभिजीत मजूमदार ने असम टीएमसी प्रमुख के पद से इस्तीफा देकर संगठन को एक और झटका दिया है। काकोली घोष ने भी पार्टी के सभी संगठनात्मक पदों से खुद को अलग कर लिया है।