असम विधानसभा चुनाव 2026 की आहट के साथ ही राज्य का राजनीतिक पारा चढ़ गया है। कांग्रेस ने इस बार एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा रणनीतिक दांव खेला है। बीते दिनों पार्टी हाईकमान ने प्रियंका गांधी वाड्रा को असम चुनाव के लिए ‘स्क्रीनिंग कमेटी’ का अध्यक्ष नियुक्त किया है। यह पहली बार है जब गांधी परिवार के किसी सदस्य को सीधे तौर पर किसी राज्य में उम्मीदवारों के चयन जैसी महत्वपूर्ण और तकनीकी जिम्मेदारी सौंपी गई है।
क्यों खास है प्रियंका गांधी की यह जिम्मेदारी?
आमतौर पर स्क्रीनिंग कमेटी का अध्यक्ष पार्टी के वरिष्ठ संगठनात्मक नेताओं को बनाया जाता है। लेकिन प्रियंका गांधी को यह जिम्मेदारी देकर कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि असम उसके लिए केवल एक राज्य नहीं, बल्कि भाजपा के खिलाफ वर्चस्व की लड़ाई का मुख्य केंद्र है।
कांग्रेस की रणनीति के 5 बड़े कारण:
1. गुटबाजी पर लगाम और अनुशासन – असम कांग्रेस लंबे समय से आंतरिक कलह और गुटबाजी से जूझती रही है। प्रियंका गांधी की मौजूदगी का मतलब है ‘यूनिटी ऑफ कमांड’। उनके अध्यक्ष होने से टिकट बंटवारे के दौरान स्थानीय नेताओं के बीच होने वाली खींचतान कम होगी और पार्टी एक अनुशासित इकाई के रूप में चुनाव लड़ेगी।
2. गौरव गोगोई के साथ मजबूत जुगलबंदी – असम में कांग्रेस का चेहरा अब युवा नेता गौरव गोगोई हैं। प्रियंका गांधी और गौरव गोगोई की केमिस्ट्री काफी अच्छी मानी जाती है। प्रियंका के पर्दे के पीछे के प्रबंधन और गौरव के जमीनी प्रचार से कांग्रेस युवाओं और मध्यम वर्ग को साधने की कोशिश में है।
3. उम्मीदवारों का सही चयन – 2021 के चुनावों में कांग्रेस और भाजपा के बीच वोट प्रतिशत का अंतर केवल 1.6% था। कांग्रेस का मानना है कि अगर सही और जिताऊ उम्मीदवारों को मैदान में उतारा जाए, तो सत्ता की चाबी दोबारा हासिल की जा सकती है। प्रियंका गांधी खुद हर सीट का फीडबैक लेंगी।
4. महिला वोट बैंक पर फोकस – असम की राजनीति में महिलाओं की भूमिका निर्णायक रही है। प्रियंका गांधी की छवि महिलाओं के बीच काफी लोकप्रिय है। उनके नेतृत्व में पार्टी ‘महिला केंद्रित’ घोषणापत्र और रणनीति तैयार कर रही है ताकि भाजपा के ‘लाडली बहना’ जैसे कार्यक्रमों का मुकाबला किया जा सके।
5. भाजपा के ‘चाणक्य’ को सीधी चुनौती – असम में मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा को भाजपा का सबसे बड़ा रणनीतिकार माना जाता है। कांग्रेस ने प्रियंका को उतारकर यह संदेश दिया है कि वह इस बार डिफेंसिव नहीं बल्कि आक्रामक मोड में है। यह मुकाबला अब ‘प्रियंका गांधी बनाम हिमंता बिस्वा सरमा’ के नैरेटिव पर टिक गया है।