असम विधानसभा चुनाव की औपचारिक घोषणा भले ही अभी बाकी हो, लेकिन राज्य की सियासत में चुनावी हलचल तेज हो चुकी है। सूत्रों के मुताबिक चुनाव की तारीखों का ऐलान अगले महीने की शुरुआत में हो सकता है। इसी बीच सत्तारूढ़ भाजपा ने सत्ता में वापसी के लिए दोहरी रणनीति पर काम तेज कर दिया है, तो वहीं कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है।
असम कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष Bhupen Kumar Borah ने कांग्रेस पार्टी छोड़ने का फैसला कर लिया है। जानकारी के अनुसार, वे 22 फरवरी को औपचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण करेंगे। मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma ने भूपेन बोरा से मुलाकात के बाद इस घटनाक्रम की पुष्टि की। बताया जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच हाल ही में हुई मुलाकात के बाद ही यह फैसला अंतिम रूप में लिया गया।
भूपेन बोरा का कांग्रेस छोड़ना पार्टी के लिए चुनाव से ठीक पहले बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है, क्योंकि वे संगठनात्मक स्तर पर मजबूत पकड़ रखने वाले नेता माने जाते रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा इस बार चुनाव में दो मोर्चों पर काम कर रही है—
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संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करना
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विपक्षी दलों के प्रभावशाली नेताओं को अपने साथ जोड़ना
भूपेन बोरा का भाजपा में शामिल होना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। भाजपा नेतृत्व का लक्ष्य कांग्रेस की पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाना और क्षेत्रीय समीकरणों को अपने पक्ष में मोड़ना है।
भूपेन बोरा के इस्तीफे से कांग्रेस की राज्य इकाई में असंतोष की चर्चा भी तेज हो गई है। चुनावी साल में पार्टी के वरिष्ठ नेता का जाना संगठनात्मक कमजोरी के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। कांग्रेस अब डैमेज कंट्रोल मोड में नजर आ रही है और पार्टी नेतृत्व नए सिरे से रणनीति बनाने में जुटा है।
असम की राजनीति में दलबदल का असर अक्सर सीटों के गणित पर पड़ता रहा है। ऐसे में भूपेन बोरा के भाजपा में जाने से कई विधानसभा क्षेत्रों में समीकरण बदल सकते हैं। खासकर उन इलाकों में, जहां उनका व्यक्तिगत प्रभाव रहा है। चुनाव आयोग द्वारा तारीखों की घोषणा के बाद राजनीतिक सरगर्मी और तेज होने की संभावना है। फिलहाल, असम में सियासी तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है और आने वाले दिनों में और बड़े राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं।
























