नशे के काले कारोबार और अवैध कोडीन कफ सिरप की तस्करी के खिलाफ सोनभद्र पुलिस को अब तक की सबसे बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने कोलकाता में छापेमारी कर जुबैर शेख को गिरफ्तार किया है, जो देशव्यापी ‘शुभम जायसवाल सिंडिकेट’ का मुख्य स्तंभ माना जा रहा है। जुबैर की गिरफ्तारी से न केवल तस्करी के रूट का खुलासा हुआ है, बल्कि इसके तार अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से भी जुड़ते नजर आ रहे हैं।
तस्करी का यह तरीका बेहद शातिर था। जुबैर का गैंग कोडीन सिरप की खेप को ट्रकों में चावल की बोरियों के नीचे छिपाकर ले जाता था। पकड़े जाने के डर से जुबैर स्थानीय ड्राइवरों (यूपी, बिहार, बंगाल) पर भरोसा नहीं करता था। वह केवल महाराष्ट्र के ड्राइवरों का इस्तेमाल करता था ताकि भाषा और दूरी की वजह से राज सुरक्षित रहें। ये ट्रक बांग्लादेश बॉर्डर से कुछ दूर पहले दूसरे साथियों को सौंप दिए जाते थे।
इस सिंडिकेट की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जुबैर के कई साथी फिलहाल बिहार की पूर्णिया जेल में बंद हैं। जुबैर शेख मूल रूप से महाराष्ट्र के औरंगाबाद का रहने वाला है और वह शुभम जायसवाल के लिए लॉजिस्टिक्स और बॉर्डर पार कराने का जिम्मा संभालता था।
पुलिस सूत्रों कि मानें तो सोनभद्र की एक सड़क से शुरू हुई जांच ने एक अंतरराज्यीय रैकेट का भंडाफोड़ किया है। जुबैर को ट्रांजिट रिमांड पर सोनभद्र लाया गया है, जिससे पूछताछ में और भी चौंकाने वाले खुलासे होने की उम्मीद है।
इस पूरे मामले की शुरुआत पिछले साल 2025 के 18 अक्टूबर को हुई थी, जब सोनभद्र के वाराणसी-शक्तिनगर हाईवे पर पुलिस और आबकारी टीम ने एक ट्रक को रोका था। चेकिंग के दौरान ड्राइवर का घबराना पुलिस को खटक गया। जांच हुई तो चिप्स और स्नैक्स के पैकेटों के नीचे अवैध कोडीन सिरप का जखीरा मिला। उसी दौरान राजस्थान और एमपी में कफ सिरप से बच्चों की मौत के बाद यूपी में हाई अलर्ट था।
सोनभद्र पुलिस की सक्रियता ने इस छोटी सी कड़ी को एक बड़े सिंडिकेट में बदल दिया। गाजियाबाद के गोदाम से डेढ़ लाख शीशियां बरामद हुईं। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर तीन सदस्यीय SIT गठित की गई। इसके बाद सौरभ त्यागी, विभोर राणा और शुभम जायसवाल जैसे बड़े नाम सामने आए।
SIT की जांच ने यूपी के जौनपुर, चंदौली, गाजीपुर से लेकर झारखंड, बंगाल और मध्य प्रदेश तक हड़कंप मचा दिया। पुलिस अब फैक्ट्रियों तक पहुंच चुकी है और जुबैर की गिरफ्तारी को इस पूरे सिंडिकेट की कमर तोड़ने वाली कार्रवाई माना जा रहा है।















