सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी 2024 में इलेक्टोरल बॉन्ड योजना को असंवैधानिक करार देकर खत्म कर दिया था। कई लोगों को लगा कि इससे राजनीतिक पार्टियों की फंडिंग पर असर पड़ेगा, लेकिन ताजा आंकड़े बताते हैं कि इसका उल्टा हुआ। वित्त वर्ष 2024-25 में इलेक्टोरल ट्रस्टों के जरिए राजनीतिक दलों को कुल 3,811 करोड़ रुपये का चंदा मिला, जो पिछले साल (2023-24) के 1,218 करोड़ से तीन गुना से ज्यादा है।
चुनाव आयोग को सौंपी रिपोर्ट्स के अनुसार, 9 सक्रिय इलेक्टोरल ट्रस्टों ने यह राशि वितरित की। सबसे बड़ा हिस्सा सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) को मिला – कुल 3,112 करोड़ रुपये, यानी करीब 82%। प्रमुख ट्रस्ट प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट ने अकेले 2,668 करोड़ रुपये बांटे, जिसमें से 2,180 करोड़ BJP को गए। अन्य ट्रस्टों जैसे प्रोग्रेसिव इलेक्टोरल ट्रस्ट (टाटा ग्रुप से जुड़ा) ने भी BJP को भारी योगदान दिया।कांग्रेस को इन ट्रस्टों से करीब 299 करोड़ रुपये मिले, जो कुल का सिर्फ 8% है। बाकी 400 करोड़ रुपये अन्य पार्टियों जैसे TMC, AAP, TDP आदि में बंटे।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक 20 दिसंबर, 2025 तक रजिस्टर्ड 19 इलेक्टोरल ट्रस्टों में से 13 की चंदा रिपोर्ट चुनाव आयोग के पास उपलब्ध थी. नौ ट्रस्टों ने पार्टियों को कुल 3,811 करोड़ रुपये का चंदा देने की जानकारी दी है. बीते साल यानी 2023-2024 को देखें, तो ट्रस्टों द्वारा दिए गए कुल 1,218 करोड़ रुपये के चंदे में 200% से ज्यादा की बढ़ोतरी देखने को मिली है. यानी इस बार तीन गुना ज्यादा चंदा मिला. इनमें चार ट्रस्टों जनहित, परिवर्तन, जयहिंद और जयभारत ने 2024-2025 में कोई चंदा नहीं देने की जानकारी दी है ।
यह आंकड़े दिखाते हैं कि कॉर्पोरेट डोनर्स ने बॉन्ड के विकल्प के रूप में ट्रस्टों को चुना, जहां डोनर की पहचान ट्रस्ट को पता होती है, लेकिन पार्टियों को ट्रस्ट करता है।विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रस्ट रूट अधिक पारदर्शी है, क्योंकि ट्रस्ट डोनर्स और प्राप्तकर्ताओं की डिटेल चुनाव आयोग को देते हैं। फिर भी, यह सवाल उठाता है कि सत्ता में रहने वाली पार्टी को इतना बड़ा लाभ क्यों मिल रहा है? कॉर्पोरेट्स जैसे ITC, Vedanta, Hero Enterprises आदि के योगदान से BJP की फंडिंग मजबूत हुई है।यह बदलाव भारतीय राजनीति की फंडिंग में नया अध्याय है, जहां अनाम बॉन्ड की जगह ट्रस्टों ने ले ली है। लेकिन पारदर्शिता और समान अवसर के मुद्दे अभी भी बाकी हैं।






























