यह दर्दनाक घटना झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के चाईबासा सदर अस्पताल से जुड़ी है, जो 19 दिसंबर 2025 को हुई। एक गरीब आदिवासी परिवार के पिता डिम्बा चतोम्बा को अपने मृत बच्चे का शव घर ले जाने के लिए अस्पताल से एंबुलेंस नहीं मिली, जिसके कारण वे मजबूरी में शव को एक सस्ते थैले (प्लास्टिक बैग) में रखकर बस से घर लौटे।
मौत के बाद परिवार ने शव घर ले जाने के लिए एंबुलेंस या शव वाहन की मांग की, लेकिन घंटों इंतजार के बावजूद कोई व्यवस्था नहीं हुई। अस्पताल में केवल एक शव वाहन था, जो उस समय दूसरे जगह व्यस्त था। गरीब परिवार के पास निजी वाहन का इंतजाम नहीं था। मजबूरी में पिता ने अस्पताल कर्मचारियों से चंदा लेकर 20 रुपये में एक प्लास्टिक थैला खरीदा और बच्चे का शव उसमें रखकर बस से नोवामुंडी तक गए। वहां से पैदल जंगल-पहाड़ पार कर गांव पहुंचे।
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि परिवार ने औपचारिक मांग नहीं की या जल्दबाजी में चले गए। जांच में पाया गया कि अगर इंतजार करते तो व्यवस्था हो जाती। स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने नाराजगी जताते हुए जांच के आदेश दिए। जिला प्रशासन ने भी जांच शुरू की। विपक्ष ने सरकार पर स्वास्थ्य सेवाओं की लापरवाही का आरोप लगाया।यह घटना ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में एंबुलेंस व शव वाहन की कमी को रेखांकित करती है। तस्वीरें वायरल होने से पूरे राज्य में आक्रोश है।






























