ओला इलेक्ट्रिक के फाउंडर और सीईओ भाविश अग्रवाल ने 16 दिसंबर 2025 को बल्क डील के जरिए कंपनी के 2.6 करोड़ शेयर बेचे। इस सौदे की कुल वैल्यू करीब 92 करोड़ रुपये रही, जहां शेयरों की औसत कीमत 34.99 रुपये प्रति शेयर थी। यह खबर सामने आने के बाद कंपनी के शेयर में गिरावट देखी गई, लेकिन असल वजह क्या थी? आइए विस्तार से समझते हैं। मुख्य कारण: 260 करोड़ का लोन चुकानाकंपनी की ओर से जारी बयान के अनुसार, यह ट्रांजैक्शन पूरी तरह पर्सनल लेवल पर एक बार की मॉनिटाइजेशन थी। इसका मकसद प्रमोटर लेवल पर लिया गया 260 करोड़ रुपये का लोन पूरी तरह चुकाना था। इस लोन को चुकाने के बाद, पहले गिरवी रखे गए सभी शेयर (करीब 3.93% हिस्सेदारी) रिलीज हो गए।
अब कंपनी पर कोई प्लेज ओवरहैंग नहीं रहा, जो स्टॉक के लिए एक पॉजिटिव संकेत है।यह लोन भाविश अग्रवाल ने अपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी क्रुट्रिम (Krutrim AI) को फंड करने के लिए लिया था। क्रुट्रिम अब क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर प्लेयर बन चुकी है और पॉजिटिव कैश फ्लो जेनरेट कर रही है, इसलिए आगे प्लेज की जरूरत नहीं पड़ेगी। भाविश ने ओला इलेक्ट्रिक के शेयरों को कोलैटरल रखकर यह लोन उठाया था, ताकि प्रमोटर लेवल पर एक्सटर्नल इक्विटी न डालनी पड़े।बैकग्राउंड: स्टॉक की गिरावट और चुनौतियांओला इलेक्ट्रिक का स्टॉक 2025 में करीब 60% तक गिर चुका है। अगस्त 2024 में IPO के समय शेयर 76 रुपये पर लिस्ट हुआ था और दिसंबर 2024 में 102.50 रुपये का हाई छुआ, लेकिन अब यह 34-35 रुपये के आसपास ट्रेड कर रहा है। वजहें कई हैं:
- कमजोर सेल्स और मार्केट शेयर का घटना (प्रतिद्वंद्वी जैसे TVS, Bajaj और Ather से कंपटीशन)
- सितंबर 2025 क्वार्टर में रेवेन्यू में भारी गिरावट (43% YoY डाउन)
- लगातार लॉस, हालांकि नेट लॉस थोड़ा कम हुआ
इसी गिरावट के बीच प्लेज्ड शेयरों पर रिस्क बढ़ रहा था, इसलिए लोन चुकाकर प्लेज हटाना एक स्मार्ट मूव माना जा रहा है। इससे प्रमोटर की फाइनेंशियल पोजीशन मजबूत हुई और कंपनी पर अनावश्यक वोलेटिलिटी का खतरा कम हुआ।असर और आगे की स्थितिइस सौदे के बाद प्रमोटर ग्रुप की होल्डिंग 34% से ज्यादा रह गई, जो नई लिस्टेड कंपनियों में सबसे ऊंची है। कंपनी ने साफ कहा कि यह ट्रांजैक्शन ओला इलेक्ट्रिक के ऑपरेशंस, गवर्नेंस या लॉन्ग-टर्म प्लान पर कोई असर नहीं डालेगा। प्रमोटर कंट्रोल पूरी तरह बरकरार है।कुछ एनालिस्ट्स इसे पॉजिटिव मान रहे हैं, क्योंकि प्लेज हटने से स्टॉक पर ओवरहैंग खत्म हुआ। हालांकि, कंपनी की फंडामेंटल चुनौतियां (सेल्स ग्रोथ, प्रॉफिटेबिलिटी) अभी बाकी हैं। 17 दिसंबर को शेयर में कुछ रिकवरी देखी गई, लेकिन लॉन्ग टर्म में EV मार्केट की ग्रोथ और कंपनी की एक्जीक्यूशन पर निर्भर करेगा।

भाविश अग्रवाल का यह कदम रिस्क मैनेजमेंट का हिस्सा था। क्रुट्रिम को फंड करने के लिए लिया लोन चुकाकर उन्होंने व्यक्तिगत डेट क्लियर किया और ओला इलेक्ट्रिक को प्लेज-फ्री बनाया। यह दिखाता है कि फाउंडर अपनी दूसरी वेंचर्स के लिए भी एक्टिव हैं, लेकिन ओला इलेक्ट्रिक पर कमिटमेंट बरकरार है। निवेशकों के लिए यह एक मिक्स्ड सिग्नल है – शॉर्ट टर्म प्रेशर, लेकिन लॉन्ग टर्म स्टेबिलिटी।