भारतीय राजनीति के बिसात पर पिछले एक दशक में अगर कुछ सबसे तेजी से बदला है, तो वह है भाजपा का अपने सहयोगियों के साथ समीकरण। कभी क्षेत्रीय क्षेत्रिय पार्टियों के पीछे चलने वाली भारतीय जनता पार्टी अब ‘ड्राइविंग सीट’ पर है। राज्यसभा चुनाव के लिए विनोद तावड़े, रामदास आठवले, रामराव वडकुते और माया इवनाते के नामों का ऐलान महज एक चुनावी प्रक्रिया नहीं, बल्कि बिहार के बाद अब महाराष्ट्र की राजनीति में भाजपा के ‘एकछत्र राज’ की मुनादी है। आईये आपको बताते हैं कैसे ‘छोटे भाई’ से ‘किंगमेकर’ और फिर ‘किंग’ बन गई भाजपा?
महाराष्ट्र में दशकों तक शिवसेना (अविभाजित) ‘बड़े भाई’ की भूमिका में रही और भाजपा उसकी छाया में। लेकिन 2014 के बाद स्क्रिप्ट बदल गई। 2022 में एकनाथ शिंदे की बगावत के समय भाजपा ने रणनीतिक रूप से पीछे हटकर शिंदे को मुख्यमंत्री बनाया। यह ‘त्याग’ नहीं, बल्कि भविष्य की बड़ी जीत की नींव थी।
2024 के विधानसभा चुनाव में 132 सीटें जीतकर भाजपा ने साबित कर दिया कि वह राज्य की असली धुरी है। 57 सीटों वाली शिवसेना (शिंदे) और 41 सीटों वाली NCP (अजित पवार) के मुकाबले भाजपा का कद इतना बड़ा हो गया कि मुख्यमंत्री की कुर्सी फिर से देवेंद्र फडणवीस के पास आ गई।
बिहार की कहानी भी महाराष्ट्र से जुदा नहीं है। सालों तक नीतीश कुमार गठबंधन का चेहरा रहे, लेकिन भाजपा ने संगठन के दम पर खुद को इतना मजबूत किया कि 2025 के विधानसभा चुनाव में वह 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी शक्ति बन गई। 85 सीटों पर सिमटी JDU अब भाजपा की नीतियों और रणनीति के साथ चलने को मजबूर है।
राज्यसभा की 37 सीटों पर होने वाले चुनाव भाजपा के लिए अपनी ताकत दिखाने का एक और मौका है। भाजपा की इस बढ़त के पीछे कोई इत्तेफाक नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति है। पन्ना प्रमुख से लेकर प्रदेश अध्यक्ष तक, भाजपा का कैडर आधारित ढांचा क्षेत्रीय दलों के मुकाबले कहीं ज्यादा सक्रिय है।
पार्टी ने केवल सवर्णों तक सीमित न रहकर OBC और दलित वर्गों में (जैसे माया इवनाते और रामराव वडकुते का चयन) अपनी पैठ मजबूत की है। चुनाव चाहे नगर निकाय का हो या संसद का, भाजपा उसे पूरी ताकत और नए चेहरों के साथ लड़ती है।
महाराष्ट्र और बिहार के उदाहरण यह साफ करते हैं कि भाजपा अब गठबंधन में ‘जूनियर पार्टनर’ बनकर रहने के मूड में नहीं है। पार्टी अब उस मुकाम पर है जहां वह सहयोगियों को अपनी शर्तों पर राजनीति करने के लिए प्रेरित कर रही है।

















