गुरुग्राम में तीन साल की मासूम बच्ची के साथ कथित दुष्कर्म मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार किया है। अदालत ने जांच के तरीके को न केवल ‘असंवेदनशील’ बताया, बल्कि इसे ‘बेहद चौंकाने वाला’ करार देते हुए पुलिस प्रशासन की नीयत पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाला बागजी और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ ने इस बात पर सख्त नाराजगी जाहिर की कि पीड़िता का बयान दर्ज करते समय कानूनी प्रोटोकॉल की धज्जियां उड़ाई गईं। कोर्ट ने कहा कि पीड़िता का बयान न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने आरोपियों के बिल्कुल करीब बैठाकर दर्ज करना न केवल प्रक्रिया के खिलाफ है, बल्कि यह मासूम के साथ क्रूरता है।
अदालत ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए गुरुग्राम के पुलिस आयुक्त (CP) और जांच अधिकारी (IO) को 25 मार्च को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने का निर्देश दिया है। साथ ही, कोर्ट ने राज्य सरकार से हरियाणा में तैनात सभी महिला IPS अधिकारियों की सूची भी मांगी है।
सीनियर वकील मुकुल रोहतगी ने जांच में हुई लापरवाही का कच्चा चिट्ठा कोर्ट के सामने रखा। घटना के चार हफ्ते बीत जाने के बाद भी पुलिस ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। जिस IO को केस सौंपा गया, वह पहले भी POCSO मामले में रिश्वत लेने के आरोप में सस्पेंड हो चुका है।
आरोप है कि पुलिस ने परिवार को मामला आगे न बढ़ाने की ‘सलाह’ दी। बच्ची को पुलिस स्टेशन और CWC ले जाया गया, जहाँ मजिस्ट्रेट ने मासूम से ‘सच बोलो’ जैसे शब्द कहे और आरोपी को उसके सामने लाया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जाहिर करते हुए चार साल की बच्ची के साथ इस तरह की असंवेदनशीलता अविश्वसनीय है। ऐसे मामलों में शिकायत का इंतजार किए बिना तुरंत FIR दर्ज होनी चाहिए थी।”
पीड़ित पक्ष की ओर से मुकुल रोहतगी ने मांग की है कि गुरुग्राम पुलिस से जांच वापस लेकर इसे या तो CBI को सौंपा जाए या फिर एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया जाए। राज्य सरकार ने सफाई दी कि पहले एक महिला अधिकारी जांच कर रही थी, लेकिन उनके सस्पेंड होने के बाद SHO ने कमान संभाली, हालांकि कोर्ट इस दलील से संतुष्ट नजर नहीं आया। अदालत ने अब पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट तलब की है और 25 मार्च को अगली बड़ी सुनवाई होगी।















