तेहरान, 12 जनवरी 2026: ईरान में पिछले दो हफ्तों से चल रहे बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों के बीच सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर जोरदार हमला बोला है। शुक्रवार को राज्य टेलीविजन पर प्रसारित एक भाषण में खामेनेई ने प्रदर्शनकारियों को ‘ट्रंप के भाड़े के गुंडे’ करार दिया और कहा कि वे अपने ही देश की सड़कों को बर्बाद कर रहे हैं ताकि ‘दूसरे देश के राष्ट्रपति को खुश कर सकें’। उन्होंने ट्रंप को चेतावनी देते हुए कहा, “ट्रंप को उखाड़कर फेंक दिया जाएगा, जैसे 1979 की क्रांति में शाह की सत्ता उखाड़ फेंकी गई थी। वह भी गिरेंगे।” यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान में आर्थिक संकट, मुद्रास्फीति और सरकारी भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रदर्शन तेज हो गए हैं, और ट्रंप ने प्रदर्शनकारियों के समर्थन में अमेरिकी हस्तक्षेप की धमकी दी है।
प्रदर्शन 28 दिसंबर 2025 को शुरू हुए, जब ईरान सरकार ने ईंधन कीमतों में 50% की बढ़ोतरी की घोषणा की। शुरुआत में आर्थिक मांगों से शुरू हुए ये विरोध अब राजनीतिक हो चुके हैं, जहां लोग ‘सुप्रीम लीडर की सत्ता खत्म करो’ जैसे नारे लगा रहे हैं। मानवाधिकार समूह HRANA के अनुसार, अब तक कम से कम 62 लोग मारे जा चुके हैं, जिनमें 48 प्रदर्शनकारी और 14 सुरक्षा बल शामिल हैं। तेहरान, इस्फहान, मशहद और शिराज जैसे शहरों में इंटरनेट ब्लैकआउट और सुरक्षा बलों की हिंसक कार्रवाई की खबरें आ रही हैं। प्रदर्शनकारियों ने सरकारी इमारतों पर हमले किए, जबकि सुरक्षा बलों ने आंसू गैस, पानी की बौछार और गोलीबारी का इस्तेमाल किया।
खामेनेई ने अपने भाषण में प्रदर्शनकारियों को ‘विदेशी एजेंट’ बताया और कहा कि वे ट्रंप के इशारे पर काम कर रहे हैं। उन्होंने ट्रंप पर आरोप लगाया कि उनके हाथ ‘ईरानियों के खून से सने हैं’, खासकर जून 2025 में इजरायल-ईरान युद्ध के दौरान अमेरिकी हमलों का जिक्र करते हुए, जिसमें 1000 से ज्यादा ईरानी मारे गए थे। खामेनेई ने एकता का आह्वान किया और कहा कि इस्लामिक गणराज्य ‘पीछे नहीं हटेगा’। उनके समर्थकों ने भाषण के दौरान ‘डेथ टू अमेरिका’ के नारे लगाए। दूसरी ओर, व्हाइट हाउस से ट्रंप ने फिर चेतावनी दी कि अगर ईरान प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाएगा, तो अमेरिका ‘बहुत जोरदार तरीके से हमला करेगा’। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा, “ईरान, तुम प्रदर्शनकारियों को मत मारो, क्योंकि हम भी गोली चलाएंगे।” अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ट्रंप को ईरान पर हमलों के विकल्पों पर ब्रीफिंग दी गई है, लेकिन ‘जमीनी सैनिक’ नहीं भेजे जाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह धमकी ईरान में राष्ट्रवाद को भड़का सकती है, लेकिन प्रदर्शनकारियों को हौसला भी दे रही है। ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी ने प्रदर्शनकारियों से शहरों पर कब्जा करने की अपील की है।
यह संकट अमेरिका-ईरान संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जा सकता है। 2018 में ट्रंप द्वारा परमाणु समझौते से बाहर निकलने के बाद से तनाव बढ़ा है, और अब प्रदर्शन इसे और गहरा रहे हैं। ईरान की अर्थव्यवस्था अमेरिकी प्रतिबंधों से चरमरा गई है, जहां मुद्रास्फीति 40% से ऊपर है और बेरोजगारी युवाओं को सड़कों पर ला रही है। खामेनेई का बयान प्रदर्शनों को दबाने की रणनीति का हिस्सा लगता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ रहा है। यूरोपीय संघ और संयुक्त राष्ट्र ने हिंसा की निंदा की है।ईरान में महिलाओं और युवाओं की अगुवाई में ये प्रदर्शन 2022 के महसा अमीनी विरोध की याद दिलाते हैं, लेकिन इस बार आर्थिक मुद्दे प्रमुख हैं। अगर ट्रंप की धमकी अमल में आई, तो मध्य पूर्व में नया संघर्ष छिड़ सकता है। फिलहाल, ईरान सरकार ने ‘आतंकवादियों’ के खिलाफ कार्रवाई का ऐलान किया है, जबकि प्रदर्शनकारी ‘स्वतंत्रता’ की मांग कर रहे हैं। स्थिति पर दुनिया की नजरें टिकी हैं।








