भारतीय रेलवे ने जून 2025 में पांच साल बाद ट्रेन किराए में मामूली बढ़ोतरी की घोषणा की, जो 1 जुलाई 2025 से लागू हुई। नवभारत टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस बढ़ोतरी से रेलवे पर सचमुच “पैसों की बारिश” होने की उम्मीद थी। किराया वृद्धि का मुख्य उद्देश्य बढ़ती परिचालन लागत को पूरा करना और यात्री सेवाओं की वित्तीय स्थिरता बनाए रखना था।
किराया बढ़ोतरी की डिटेल्स:
- नॉन-एसी मेल/एक्सप्रेस ट्रेनों में 1 पैसा प्रति किलोमीटर।
- एसी क्लास (चेयर कार, 2-टियर, 3-टियर आदि) में 2 पैसे प्रति किलोमीटर की बढ़ोतरी।
- लोकल ट्रेनें, सबअर्बन सेवाएं, मंथली सीजन टिकट और 500 किमी तक की साधारण दूसरी क्लास यात्रा पर कोई असर नहीं।
उदाहरण के लिए, 500 किमी की नॉन-एसी यात्रा पर सिर्फ 5-10 रुपये अतिरिक्त, जबकि लंबी दूरी जैसे दिल्ली-मुंबई पर 30-50 रुपये ज्यादा।
कमाई का अनुमान:
वित्त वर्ष 2025-26 के लिए रेलवे ने यात्री कमाई का लक्ष्य 92,800 करोड़ रुपये रखा है, जो पिछले साल से करीब 16% ज्यादा है। जुलाई 2025 की किराया बढ़ोतरी से बाकी बचे महीनों (तीन तिमाही) में करीब 700 करोड़ रुपये की अतिरिक्त कमाई का अनुमान लगाया गया। पूरे साल के लिए यह आंकड़ा 900-1,000 करोड़ तक हो सकता था। रेलवे की कुल कमाई में माल ढुलाई का हिस्सा 65% है, लेकिन यात्री सेगमेंट में वंदे भारत जैसी प्रीमियम ट्रेनों की मांग से भी ग्रोथ की उम्मीद है।
वित्त वर्ष 2025-26 के लिए रेलवे ने यात्री कमाई का लक्ष्य 92,800 करोड़ रुपये रखा है, जो पिछले साल से करीब 16% ज्यादा है। जुलाई 2025 की किराया बढ़ोतरी से बाकी बचे महीनों (तीन तिमाही) में करीब 700 करोड़ रुपये की अतिरिक्त कमाई का अनुमान लगाया गया। पूरे साल के लिए यह आंकड़ा 900-1,000 करोड़ तक हो सकता था। रेलवे की कुल कमाई में माल ढुलाई का हिस्सा 65% है, लेकिन यात्री सेगमेंट में वंदे भारत जैसी प्रीमियम ट्रेनों की मांग से भी ग्रोथ की उम्मीद है।
हाल ही में दिसंबर 2025 में फिर किराया संरचना में बदलाव किया गया (26 दिसंबर से लागू), जिससे इस वित्त वर्ष में अतिरिक्त 600 करोड़ रुपये की कमाई की उम्मीद है। यह बदलाव भी मुख्य रूप से लंबी दूरी की मेल/एक्सप्रेस और एसी ट्रेनों पर लागू है, छोटी दूरी और लोकल पर नहीं।रेलवे का कहना है कि यह बढ़ोतरी न्यूनतम है, ताकि आम यात्रियों पर बोझ न पड़े, जबकि सेवाओं में सुधार (सुरक्षा, नई ट्रेनें) जारी रहे। कुल मिलाकर, 2025 में इन बदलावों से रेलवे की झोली में अच्छी-खासी अतिरिक्त रकम आने की संभावना है।





























