अजित पवार के विमान दुर्घटना में निधन के बाद महाराष्ट्र की राजनीति गहरे शोक में डूबी हुई थी, लेकिन राजनीतिक गलियारों में एक और चर्चा जोरों पर थी—एनसीपी के दोनों गुटों के विलय की। हालांकि, शुक्रवार शाम तक यह माहौल बदल गया। अजित गुट ने सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री पद के लिए नामित कर दिया, जिससे साफ हो गया कि पार्टी और परिवार अलग-अलग रास्ते पर चलेंगे। अजित पवार के निधन से महाराष्ट्र की राजनीति में न केवल एक मजबूत नेता का साया गया, बल्कि एक तरह का स्थिरता का दौर भी थम गया। चारों ओर शोक की लहर थी—परिवार में सन्नाटा, कार्यकर्ताओं में अविश्वास और टूटन का भाव।
लेकिन इसी मौन के बीच मुंबई में सत्ता की गतिविधियां तेज हो गईं। पवार परिवार अभी दुख से उबर भी नहीं पाया था कि एक बड़ा राजनीतिक फैसला सामने आ गया—सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री बनाने का। यह कदम महज किसी खाली पद को भरने की औपचारिकता नहीं था, बल्कि उस क्षण की कहानी थी जहां भावनाओं पर राजनीति हावी हो गई और पार्टी विलय की संभावनाएं अचानक सत्ता की प्राथमिकताओं के आगे फीकी पड़ गईं।
अजित पवार के निधन के बाद एनसीपी (शरद पवार) गुट के वरिष्ठ नेताओं का दावा था कि विलय की बातें तीन-चार महीनों से चल रही थीं और यह लगभग तय हो चुका था। एकनाथ खडसे, अनिल देशमुख, राजेश टोपे जैसे नेताओं ने खुलकर कहा कि सिर्फ औपचारिक घोषणा बाकी थी। यहां तक कि अजित पवार की आखिरी इच्छा भी यही बताई गई कि पार्टी एक हो और शरद पवार के जन्मदिन तक यह एकजुटता का तोहफा दिया जाए। लेकिन मुंबई में दूसरी ही कहानी चल रही थी।
अजित गुट के प्रमुख नेता—प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे, छगन भुजबल, धनंजय मुंडे—ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक की। एजेंडा स्पष्ट था – विधायक दल का नया नेता कौन? खाली पड़े उपमुख्यमंत्री पद का क्या? यहीं सुनेत्रा पवार का नाम सर्वसम्मति से आगे आया। छगन भुजबल ने खुद स्वीकार किया कि उन्होंने प्रफुल्ल पटेल और तटकरे के साथ मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की और फैसला लिया कि विधायक दल के नेता के रूप में सुनेत्रा पवार का नाम प्रस्तावित किया जाएगा, साथ ही उपमुख्यमंत्री पद पर भी चर्चा हुई। शोक की छाया में सत्ता का खेल तेजी से आगे बढ़ चुका था।
सूत्रों के अनुसार, मुंबई में ये फैसले हो रहे थे, जबकि पवार परिवार की बैठक में सुनेत्रा पवार शामिल नहीं थीं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि शरद पवार या एनसीपी (एसपी) नेतृत्व को सुनेत्रा के उपमुख्यमंत्री बनने की कोई पूर्व जानकारी नहीं थी। इससे स्पष्ट हो गया कि विलय की बातें पटरी से उतरकर सीधे सत्ता की कुर्सी पर केंद्रित हो गईं।
बारामती में शरद पवार ने साफ कहा, ‘मुझे सुनेत्रा पवार के नाम की कोई जानकारी नहीं। अखबार में पढ़ा। यह उनके दल का फैसला होगा।’ उन्होंने संकेत दिया कि फैसले मुंबई में हो रहे हैं, परिवार में नहीं। साथ ही एनडीए में शामिल होने की कोई संभावना से इनकार किया। एनसीपी (एसपी) नेता विलय की बात पर जोर दे रहे हैं, जबकि अजित गुट चुप है। सुनील तटकरे और छगन भुजबल का रुख है कि फिलहाल सिर्फ विधायक दल नेता और उपमुख्यमंत्री पर फोकस है—विलय की चर्चा को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
सुनेत्रा पावर, जो अभी विधानसभा या विधान परिषद की सदस्य नहीं हैं, विधायक दल की नेता चुनी जाएंगी और महाराष्ट्र की पहली महिला उपमुख्यमंत्री बनने का मार्ग प्रशस्त होगा। बता दें कि अजित पवार एनसीपी के प्रमुख और महायुति सरकार में उपमुख्यमंत्री थे, वित्त जैसे महत्वपूर्ण विभाग संभाल रहे थे। उनके निधन के बाद राजनीतिक विरासत संभालने के लिए सुनेत्रा पवार को उत्तराधिकारी के रूप में चुना गया। परिवार में इस जल्दबाजी से नाराजगी है, जबकि सत्ता पक्ष ने फैसला तेजी से लागू कर दिया।















